पश्चिम यूपी पर अखिलेश की पैनी नजर—गाजियाबाद में सियासी मंथन
स्क्रीन से ऐलान — किसान आयोग का प्लान गन्ना भुगतान, स्मार्ट मीटर और पलायन पर सरकार पर सीधा वार , साथ ही 2027 से पहले पश्चिम यूपी में ‘PDA’ और नए समीकरण की बिसात

गाजियाबाद में “विजन इंडिया प्लान डेवलप एसेंट” सम्मेलन में किसानों के मुद्दों पर जोरदार मंथन हुआ, लेकिन जिस चेहरे का इंतजार था, वो मंच पर नहीं दिखा। अखिलेश यादव खुद कार्यक्रम में नहीं पहुंचे—लेकिन लखनऊ से वर्चुअल जुड़कर उन्होंने सियासी पारा जरूर चढ़ा दिया।
दरअसल, ये सिर्फ एक सम्मेलन नहीं था—ये 2027 की तैयारी का ट्रेलर भी माना जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 140 सीटों पर नजर गड़ाए अखिलेश अब नए समीकरण गढ़ने में जुटे हैं, खासकर तब जब RLD का NDA के साथ जाना सियासी खेल बदल चुका है।
स्क्रीन पर आए अखिलेश ने सीधे किसानों के दिल पर चोट की। सबसे बड़ा ऐलान—किसान आयोग बनाने का वादा। कहा, अब किसानों की समस्याएं फाइलों में नहीं अटकेंगी। गन्ना उत्पादक किसानों के लिए साफ संदेश—पर्ची कटते ही तौल और सीधे खाते में भुगतान।
इसके बाद सरकार पर सीधा हमला—स्मार्ट मीटर योजना को बताया “आर्थिक बोझ”। बोले, बिजली उत्पादन बढ़ाने के बजाय जनता से वसूली हो रही है, जबकि उनकी सरकार में नए बिजली संयंत्र लगाए गए थे। मुफ्त बिजली के अधूरे वादों को भी उन्होंने खुलकर उठाया।
लेकिन असली वार भावनाओं पर था—अखिलेश ने किसानों की टूटती मानसिक स्थिति और गिरती सामाजिक गरिमा पर चिंता जताई। सवाल उछाला—
“क्यों किसान का बेटा खेती छोड़ रहा है?”
और जवाब दिया—कम होती आय और बढ़ती मुश्किलें।
पलायन पर भी उन्होंने सख्त रुख दिखाया—कहा, गांव छोड़कर शहर जाने वाला किसान वहां भी सम्मान और सुविधाओं से वंचित है। समाधान बताया—गांव में ही रोजगार, मजबूत ढांचा और कच्चे माल को तैयार उत्पाद में बदलने की नीति, ताकि किसान की आय बढ़ सके।
इसी के साथ, पश्चिम यूपी में नई सियासी बिसात भी साफ दिखी। ‘PDA’—पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक—के साथ अब गुर्जर समुदाय को साधने की कोशिशें तेज हैं। हाल ही में हुई “समाजवादी समता भाईचारा रैली” और मिहिर भोज स्मारक व विजय सिंह पाथिक की प्रतिमा जैसे वादे इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
सम्मेलन में तकनीक का तड़का भी लगा—हांगकांग के उद्यमी बृजेंद्र यादव ने खेती में AI के इस्तेमाल को गेमचेंजर बताया।
कार्यक्रम में राजीव राय, अभिषेक मिश्रा, सुधीर पंवार, हरेंद्र सिंह मलिक, इकरा हसन और आलोक रंजन जैसे कई चेहरे मौजूद रहे—लेकिन चर्चा सबसे ज्यादा उसी बात की रही…
मंच भले खाली था, लेकिन पश्चिम यूपी के लिए सियासी संदेश पूरी तरह भरा हुआ था।



