ग्रेटर नॉएडानोएडा

नोएडा में प्लॉट खरीदना अब महंगा हो गया है, क्योंकि प्राधिकरण ने प्लॉट की दरों में 11% तक बढ़ोतरी कर दी है

घर और फैक्ट्री के लिए जमीन खरीदना अब पड़ेगा महंगा, अथॉरिटी ने नए रेट किए जारी कमर्शियल प्लॉट की कीमतें पहले जैसी।

Reported by India Headlines and edited by Tanushka Tangar

Property Price Rise in Noida II Noida News II Noida Property :  एनसीआर के मुख्य शहर नोएडा में अब प्लॉट खरीदना काफी महंगा हो गया है। नोएडा प्राधिकरण ने नए जमीन आवंटन दरें लागू कर दी हैं, जो कि इस बार 11 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। इस निर्णय के बाद आवासीय, औद्योगिक, संस्थागत और ग्रुप हाउसिंग प्लॉट अब पहले से ज्यादा कीमत पर मिलेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, प्राधिकरण ने गुरुवार को नई दरें लागू की हैं। पहले हर साल जमीन की कीमतें लगभग 5 प्रतिशत बढ़ती थीं, लेकिन इस बार बढ़ोतरी ज्यादा हुई है। अब नोएडा प्राधिकरण की सभी नई योजनाओं और बँटवारो में प्लॉट्स इन्हीं नई दरों के हिसाब से दिए जाएंगे।

अधिकारियों के मुताबिक, शहर में चल रहे विकास कार्यों और परियोजनाओं की लागत के बढ़ने के कारण यह फैसला लिया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि सड़कों, पार्कों और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, जिसे कॉस्टिंग चार्ज कहा जाता है, के बढ़ने की वजह से आवंटन दरों में बढ़ोतरी करना जरूरी हो गया है। नई दरों के अनुसार, औद्योगिक प्लॉट की कीमतों में भी इजाफा होगा। जैसे कि फेज-1 में 4000 वर्ग मीटर तक के औद्योगिक प्लॉट का आवंटन रेट 55,880 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया गया है। वहीं, फेज-2 में 60 हजार वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट का शुल्क 20 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर रखा गया है।

इस बार प्राधिकरण ने व्यावसायिक संपत्तियों की दरें नहीं बढ़ाई हैं। अधिकारियों के अनुसार, आवासीय और औद्योगिक प्लॉट के लिए लोग आरक्षित मूल्य से कई गुना अधिक बोली लगा रहे हैं, लेकिन व्यावसायिक संपत्ति में उतनी रुचि नहीं है। इसी वजह से व्यावसायिक प्लॉट की कीमतें अभी स्थिर रखी गई हैं।

इसके साथ ही, आवासीय सेक्टर में ईडब्ल्यूएस और श्रमिक कुंज भवनों के लिए दर 10,140 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्राधिकरण की नई दरें आगे चलकर शहर में फ्लैट और प्रॉपर्टी की कीमतों पर असर डाल सकती हैं।नोएडा, जो दिल्ली से सटा हुआ एनसीआर का एक प्रमुख आईटी और औद्योगिक केंद्र है, तेजी से बढ़ रहा है। इस स्थिति में जमीन की मांग के साथ-साथ कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

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