Rahul Gandhi Protest: SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत 11 विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर नाम हटाने और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है। हालांकि, मंगलवार को इस मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से याचिका और उसके साथ जमा दस्तावेजों में बताई गईं करीब 14 खामियां हैं। क्या हैं याचिका में मिली 14 खामियां? न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका की जांच के दौरान कई तकनीकी और दस्तावेजी कमियां दर्ज की हैं। इनमें कोर्ट फीस कम जमा होना, कुछ पन्नों का गायब होना और दस्तावेजों का स्पष्ट नहीं होना शामिल है। रजिस्ट्री के अनुसार, याचिका के साथ निर्धारित कोर्ट फीस से 220 रुपये कम जमा किए गए हैं। कुछ दस्तावेजों के पन्ने पढ़ने योग्य नहीं हैं, जबकि कुछ पन्ने गायब बताए गए हैं। इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट कॉपी मांगी गई है।रजिस्ट्री ने याचिका दायर करने वाले वकील से नौ याचिकाकर्ताओं की लिखित सहमति भी प्रस्तुत करने को कहा है। इन सभी कमियों को दूर किए बिना याचिका की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में परेशानी आ सकती है। क्या इसका मतलब याचिका खारिज हो गई है? नहीं। रजिस्ट्री की ओर से खामियां बताना और अदालत का याचिका खारिज करना दो अलग-अलग बातें हैं। इन आपत्तियों का समाधान करने के बाद याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया संभव हो सकती है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि अदालत ने याचिका के आरोपों पर कोई फैसला सुनाया है। विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की है? 12 अक्टूबर को दायर याचिका में विपक्षी नेताओं ने भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को पक्षकार बनाया है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को भी शामिल करने की मांग है। विपक्ष चाहता है कि यह समिति निर्धारित समयसीमा के भीतर SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और किए गए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट करे। विपक्ष का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और अनियमितताओं की आशंका है। इन आरोपों की न्यायिक जांच होना अभी बाकी है। दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं चार FIR याचिका दाखिल करने से पहले राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करके पहुंचे थे। इस मार्च के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने चार FIR दर्ज की हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले कनॉट प्लेस, बाराखंबा रोड, तिलक मार्ग और मंदिर मार्ग थानों में दर्ज किए गए हैं। इससे पहले 10 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने संसद से राष्ट्रपति भवन तक मार्च किया था। राहुल गांधी, ममता बनर्जी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत दस सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। अन्य सांसदों ने विजय चौक पर धरना दिया। राहुल गांधी ने मुलाकात के बाद मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। CJI ने मिलने से किया इनकार विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था। राहुल गांधी और खड़गे ने 12 अक्टूबर को अपनी मांगों पर ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी। हालांकि, CJI ने मुलाकात से इनकार करते हुए विपक्ष को उचित न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में याचिका दाखिल करने की सलाह दी। 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस कार्यक्रम में जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन और उस पर लगी पाबंदियां उनका मुद्दा नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और आम नागरिकों के साथ निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी याचिका दायर कर सकते हैं। विचाराधीन मामलों पर अलग से चर्चा करना न्यायिक मर्यादा के अनुरूप नहीं होगा। अब आगे क्या होगा? विपक्ष की याचिका में उठाए गए मुद्दों पर सुनवाई से पहले रजिस्ट्री की आपत्तियों को दूर करना जरूरी होगा। इसके बाद मामला अदालत के समक्ष सुनवाई के लिए आ सकता है। हालांकि, सुनवाई की तारीख और आगे की कार्रवाई अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।इस बीच राहुल गांधी ने मंगलवार शाम अपने आवास पर विपक्षी सांसदों, सिविल सोसाइटी के सदस्यों और छात्र संगठनों को चाय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया है। बैठक में कथित वोट चोरी के आरोपों, संयुक्त विरोध-प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि रजिस्ट्री की सभी खामियां दूर होने के बाद विपक्ष की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कब सुनवाई करता है और SIR से जुड़े आरोपों पर अदालत का रुख क्या रहता है। ये भी पढ़ें: UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने की तैयारी पर ब्रेक! दुकानदारों को बड़ी राहत, 15 अक्टूबर से लागू नहीं होगा नया नियम