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अंकिता भंडारी केस में नया सियासी घमासान: माता-पिता हिरासत में, खरगे ने मोदी सरकार को घेरा

अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत पर मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र को घेरा। कांग्रेस ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Ankita Bhandari Parents Detention: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। न्याय की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पहुंचे अंकिता के माता-पिता को पुलिस ने गुरुवार तड़के हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सवाल उठाया कि क्या न्याय की मांग करना अपराध है? उन्होंने माता-पिता को हिरासत में लेने की कार्रवाई को सरकार की असंवेदनशीलता बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रखेगी।

खरगे का केंद्र पर हमला

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अंकिता के माता-पिता के साथ हुए व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे माता-पिता को हिरासत में लिया गया, जबकि भाजपा से जुड़े एक नेता को राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर नियुक्त किया गया। खरगे ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि बेटी खो चुके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मामले में पीछे नहीं हटेगी और अंकिता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर क्यों उठ रहे सवाल?

अंकिता भंडारी के माता-पिता की मांग है कि दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के मामले में आगे बढ़ने से पहले सीबीआई जांच पूरी होने दी जाए। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, सुप्रिया श्रीनेत और काजी निजामुद्दीन ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। वहीं, पवन खेड़ा, ज्योतिमणि और इमरान प्रतापगढ़ी सहित कांग्रेस नेताओं ने पुलिस स्टेशन के भीतर भी विरोध जताया।

नियुक्ति पर सियासी सवाल

पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि न्याय की मांग करने वालों को हिरासत में लिया जा रहा है, जबकि आरोपों से जुड़े विवाद के बीच एक व्यक्ति को संवैधानिक पद दिया गया है। कांग्रेस ने इस नियुक्ति और मामले की जांच को लेकर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि, दुष्यंत गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है और इस संबंध में मानहानि का मुकदमा भी दायर किया है। कांग्रेस के आरोपों और नियुक्ति को लेकर उठाए गए सवालों पर संबंधित पक्षों का रुख अलग-अलग है।

क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?

उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वनंत्रा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी। चार दिन बाद उसका शव चिल्ला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले में रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को दोषी ठहराया गया तथा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। पुलकित आर्य पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा है। मामले ने उस समय राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब अपराध में एक कथित वीआईपी की भूमिका होने के आरोप सामने आए। अंकिता के परिवार और कई कार्यकर्ताओं ने इस पहलू की जांच की मांग की है। दुष्यंत गौतम का नाम भी इन आरोपों के सिलसिले में चर्चा में आया, लेकिन उन्होंने आरोपों को खारिज किया है।

न्याय की मांग पर फिर गरमाई राजनीति

अंकिता के माता-पिता की हिरासत के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस ने जहां पुलिस कार्रवाई और राज्यपाल की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं, वहीं परिवार की मांग है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठ रहे सवालों पर जांच में क्या सामने आता है और परिवार को न्याय दिलाने की मांग पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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