Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कथित चोरी के मामले में पुलिस की चार्जशीट से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच में बड़े नेटवर्क की आशंका जताई गई है। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कथित चोरी का मामला अब कई कर्मचारियों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। चार्जशीट में दर्ज बयानों और पुलिस जांच के मुताबिक, गणना कक्ष में कई दिनों से रकम हटाए जाने की बात सामने आई थी। इसी क्रम में 67 लड़कों के शामिल होने का जिक्र भी चार्जशीट में किया गया है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में इस संख्या के आधार का विस्तार से उल्लेख नहीं है। निगरानी के दौरान सामने आया मामला चार्जशीट के मुताबिक, 3 जून को दूसरी पाली में कैश काउंटिंग के दौरान कुछ गणना कर्मचारियों की गतिविधियों पर शक हुआ। गणना कर्मी मदन गोपाल निगम के बयान में करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला उर्फ शनि और अनुकल्प मिश्रा के नाम का जिक्र है। आरोप है कि इन लोगों को चढ़ावे की नोटों की गड्डियां उठाकर मेज के नीचे या अपने पास रखते हुए देखा गया। मदन गोपाल के मुताबिक, उसने इसकी जानकारी दूसरे कर्मचारियों को दी। अगले दिन इन कर्मचारियों पर निगरानी रखी गई। इसी दौरान अविनाश शुक्ला उर्फ शनि को कथित तौर पर नोटों की गड्डी उठाते देखे जाने की बात चार्जशीट में कही गई है। चेकिंग शुरू हुई तो बाथरूम में मिली रकम पुलिस के अनुसार, घटना की जानकारी ट्रस्ट की ओर से मौजूद विनय श्रीवास्तव और एसबीआई कर्मचारी सत्य प्रकाश को दी गई। इसके बाद गणना कक्ष के गेट पर कर्मचारियों की चेकिंग शुरू कराई गई। चार्जशीट के मुताबिक, चेकिंग की जानकारी मिलने के बाद कथित तौर पर रकम बाथरूम में छिपाई गई। तलाशी के दौरान वहां से 2.25 लाख रुपये बरामद हुए। रकम को बाद में सुरक्षित बॉक्स में रखवाया गया। CCTV फुटेज में कई बार गतिविधियां दर्ज पुलिस की चार्जशीट में CCTV फुटेज के आधार पर भी कई आरोप लगाए गए हैं। इसमें अविनाश शुक्ला उर्फ शनि के 85 बार कथित तौर पर चढ़ावे की रकम हटाते और चार बार अन्य आरोपियों की मदद करते दिखाई देने का दावा किया गया है। इसी तरह करुणेश पांडेय के दो बार रकम हटाने और 68 बार अन्य आरोपियों की कथित मदद करने का उल्लेख है। मनीष यादव पर 16 बार रकम अपने पास रखने और 19 बार अन्य आरोपियों की मदद करने का दावा किया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा की गतिविधियों का भी CCTV फुटेज के आधार पर उल्लेख किया गया है। आरोपियों के बीच हुई चैट में कथित तौर पर कैश के बंडलों का जिक्र भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। चंपत राय तक कैसे पहुंची पहली सूचना? चार्जशीट में दर्ज बयान के मुताबिक, 4 जून को दिल्ली से अयोध्या आते समय आनंद कुमार चौधरी ने तत्कालीन महासचिव चंपत राय को व्हाट्सऐप के जरिए गणना कक्ष के बाथरूम से बरामद 2.25 लाख रुपये का वीडियो और लिखित संदेश भेजा था। संदेश में कथित तौर पर बताया गया कि कुछ लड़के कई दिनों से रकम चोरी कर रहे थे और इसमें 67 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। अगले दिन चंपत राय के कारसेवकपुरम स्थित आवास पर डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल और नरेंद्र कुमार सिंह पहुंचे। चार्जशीट के अनुसार, नरेंद्र ने लैपटॉप पर गणना कक्ष के कुछ CCTV वीडियो दिखाए। पुलिस का दावा है कि इन वीडियो और संबंधित बयानों से कथित घटनाओं की पुष्टि होती है। 700 बैंक खातों की हुई जांच मामले की जांच के दौरान पुलिस ने करीब 700 बैंक खातों की पड़ताल की। इसमें ट्रस्टियों, आरोपितों, संदिग्धों, गणना कर्मचारियों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के खातों के लेनदेन को देखा गया। ट्रस्ट के बैंक खातों को भी जांच में शामिल किया गया। जांच में चार्जशीट के मुताबिक, चंपत राय के नाम कोई निजी बैंक खाता नहीं मिला। हालांकि, पूरे मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। ये भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा केस में बड़ा मोड़, चार्जशीट दाखिल होते ही कोर्ट में हंगामा