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ऐसी भाषा बेहद आपत्तिजनक… JD वेंस के बयान पर भारत का जवाब, जाने क्या है पूरा मामला

JD वेंस की H-1B वीजा पर टिप्पणी से भारत नाराज है। विदेश मंत्रालय ने भाषा को आपत्तिजनक बताया। अमेरिकी कार्रवाई से भारतीय IT कंपनियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

JD Vance Statement: भारत और अमेरिका के बीच H-1B वीजा और भारतीय पेशेवरों को लेकर विवाद के बीच भारत सरकार ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर वहां की अर्थव्यवस्था, तकनीकी विकास और इनोवेशन में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके योगदान को नजरअंदाज करने वाली भाषा अनुचित है।

ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर संकट

यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी श्रम विभाग ने कई बड़ी आईटी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन यानी PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की है। इस कदम से अमेरिका में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।

JD वेंस की टिप्पणी पर भारत ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति की कुछ टिप्पणियां अनुचित हैं। मंत्रालय के मुताबिक, ऐसी शब्दावली बेहद आपत्तिजनक है, जिसमें दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की झलक मिलती हो। भारत ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका की आर्थिक समृद्धि में विभिन्न देशों से आए प्रवासियों की मेहनत, उद्यमिता और नवाचार का बड़ा योगदान रहा है। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय पेशेवर भी इसी तरह अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र को मजबूत बनाने में भूमिका निभा रहे हैं।

भारतीय IT कंपनियों पर अमेरिकी कार्रवाई

अमेरिकी श्रम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, HCL और कैपजेमिनी जैसी कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने की घोषणा की गई है। अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं और अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार अवसर प्रभावित होने को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, इन आरोपों से संबंधित विस्तृत दस्तावेज और कंपनियों की प्रतिक्रियाएं इस मामले में अहम होंगी। PERM कार्यक्रम के तहत अमेरिकी नियोक्ता पात्र विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

H-1B वीजा धारकों को कितना नुकसान होगा?

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि PERM और H-1B वीजा अलग-अलग कार्यक्रम हैं। PERM आवेदन रोकने से मौजूदा H-1B वीजा की वैधता या वीजाधारकों और उनके आश्रितों की मौजूदा स्थिति पर सीधा असर नहीं पड़ता। हालांकि, प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी हो सकती है। इससे अमेरिका में लंबे समय तक रहने और काम करने की योजना बना रहे भारतीय पेशेवरों के सामने अनिश्चितता बढ़ सकती है।

भारत ने प्रतिभाओं की आवाजाही को बताया दोनों देशों के हित में

भारत ने कहा कि कुशल पेशेवरों की आवाजाही से दोनों देशों को फायदा होता है। भारतीय कर्मचारियों को बेहतर अवसर मिलते हैं, जबकि अमेरिकी कंपनियों को विशेषज्ञता, अनुसंधान, उत्पादकता और नवाचार में मदद मिलती है। जेडी वेंस पहले H-1B वीजा कार्यक्रम की आलोचना करते हुए इसे गंभीर खामियों वाला बता चुके हैं। अब भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर दोनों देशों के रुख और आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

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