QS Ranking 2027: QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 जारी हो गई है। इस बार भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नतीजे मिले-जुले रहे हैं। IIT दिल्ली ने एक बार फिर देश के सबसे बेहतर संस्थान का स्थान हासिल किया है, लेकिन एशिया की सूची में इसकी रैंकिंग नीचे खिसक गई है। हैरानी की बात यह है कि IIT दिल्ली समेत भारत के सभी छह शीर्ष संस्थानों की रैंक में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं कुछ निजी विश्वविद्यालयों ने बेहतर प्रदर्शन कर अपनी स्थिति मजबूत की है। IIT दिल्ली देश में पहले नंबर पर QS एशिया रैंकिंग 2027 में IIT दिल्ली भारत का शीर्ष संस्थान बना हुआ है। हालांकि, एशिया में इसकी रैंक 59 से गिरकर 66 हो गई है। इसी तरह IISc बेंगलुरु 64वें से 79वें स्थान पर पहुंच गया है। अन्य प्रमुख संस्थानों की स्थिति भी इस बार कमजोर रही IIT दिल्ली: 2027 में 66वीं रैंक, 2026 में 59वीं। IISc बेंगलुरु: 2027 में 79वीं रैंक, 2026 में 64वीं। IIT बॉम्बे: 2027 में 83वीं रैंक, 2026 में 71वीं। IIT मद्रास: 2027 में 85वीं रैंक, 2026 में 70वीं। IIT खड़गपुर: 2027 में 90वीं रैंक, 2026 में 77वीं। IIT कानपुर: 2027 में 97वीं रैंक, 2026 में 77वीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी टॉप-100 से बाहर इस बार दिल्ली यूनिवर्सिटी को भी बड़ा झटका लगा है। इसकी रैंकिंग 95 से गिरकर 106 हो गई है। हालांकि, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी 109वें से 104वें स्थान पर पहुंच गई, जबकि LPU ने 187वीं रैंक से छलांग लगाकर 154वां स्थान हासिल किया। भारत के टॉप-10 संस्थानों में IIT गुवाहाटी 120वें और IIT रुड़की 124वें स्थान पर हैं। हांगकांग की यूनिवर्सिटी फिर बनी एशिया की नंबर-1 एशिया की शीर्ष यूनिवर्सिटी का खिताब लगातार दूसरे साल यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के पास रहा। पेकिंग यूनिवर्सिटी दूसरे और शिंघुआ यूनिवर्सिटी तीसरे स्थान पर रही। वहीं सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग चौथे और चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग पांचवें नंबर पर रही। आखिर क्यों पिछड़ रहे भारतीय संस्थान? QS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार 26 उच्च शिक्षा प्रणालियों के 1,722 संस्थानों को रैंकिंग में जगह मिली। इनमें भारत की 325 यूनिवर्सिटी शामिल हैं, जिनमें 34 नए संस्थान हैं। इस तरह चीन के बाद भारत का प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा रहा। हालांकि, बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारतीय संस्थानों को अकादमिक और नियोक्ता प्रतिष्ठा के मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 76 प्रतिशत भारतीय विश्वविद्यालयों की अकादमिक प्रतिष्ठा और 83 प्रतिशत की नियोक्ता प्रतिष्ठा से जुड़े प्रदर्शन में कमजोरी दर्ज हुई। अंतरराष्ट्रीय छात्रों और छात्र विनिमय के मामले में भी चुनौतियां सामने आई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि देश के प्रतिष्ठित IIT और विश्वविद्यालय एशिया की रैंकिंग में अपनी स्थिति दोबारा मजबूत कैसे करेंगे। ये भी पढ़ें: रेलवे का बड़ा फैसला! दिल्ली-NCR के 6 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट बंद, 14 नवंबर तक लागू रहेगी रोक