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ऑनलाइन कॉपी चेकिंग ने गिराए CBSE के नंबर? 7 साल में सबसे खराब रहा इस बार का 12वीं रिजल्ट

ऑनलाइन कॉपी जांच के बाद Central Board of Secondary Education 12वीं रिजल्ट 7 साल में सबसे नीचे पहुंचा। सख्त मूल्यांकन से लाखों छात्रों के नंबर और रिजल्ट प्रभावित हुए।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

CBSE Class 12 Results || Results Dip Reason || 12 Results low || Online Marking: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी Central Board of Secondary Education ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है, लेकिन इस बार के नतीजों ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इस साल केवल 85.20 फीसदी छात्र पास हुए हैं, जो पिछले 7 वर्षों में सबसे कम रिजल्ट माना जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले परिणाम में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।

डिजिटल माध्यम बना चर्चा का कारण

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि पहली बार कॉपियों का मूल्यांकन पूरी तरह ऑनलाइन किया गया। छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन कर शिक्षकों को डिजिटल माध्यम से जांचने के लिए भेजी गईं। माना जा रहा है कि इसी बदलाव का असर सीधे रिजल्ट पर पड़ा। जानकारों के मुताबिक ऑनलाइन मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ी, लेकिन मार्किंग पहले की तुलना में ज्यादा सख्त हो गई। पहले ऑफलाइन कॉपी जांच के दौरान शिक्षक कई बार कुछ नंबर बढ़ाकर छात्रों को पास करा देते थे या अच्छे प्रयास पर राहत दे देते थे। मगर ऑनलाइन सिस्टम में ऐसी “उदार मार्किंग” की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई।

बड़ी संख्या में छात्र सप्लीमेंट्री की श्रेणी में

इसी वजह से इस बार बड़ी संख्या में छात्र सप्लीमेंट्री की श्रेणी में पहुंचे। बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार करीब 1.63 लाख छात्रों को सप्लीमेंट्री मिली है, यानी हर 11वां छात्र दोबारा परीक्षा देगा। यह आंकड़ा पिछले कई वर्षों में सबसे ज्यादा बताया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली को गलत नहीं मानते। उनका कहना है कि सिस्टम तकनीकी रूप से मजबूत और त्रुटिरहित है, लेकिन इससे मार्किंग का तरीका ज्यादा सख्त और वास्तविक हो गया, जिसका असर सीधे रिजल्ट पर दिखाई दिया।

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