उत्तर प्रदेशनोएडा

12 दिन में दूसरा हादसा! नोएडा एक्सप्रेसवे पर चलती स्लीपर बस एक बार फिर बनी आग का गोला

नोएडा एक्सप्रेसवे पर 32 यात्रियों से भरी स्लीपर बस में अचानक आग लगी। यात्री सामान छोड़कर बाहर भागे। सभी सुरक्षित रहे, लेकिन 12 दिन में यह दूसरी घटना है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Noida Bus Fire: नोएडा एक्सप्रेसवे पर मंगलवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दिल्ली से बिहार जा रही एक स्लीपर बस अचानक आग की चपेट में आ गई। बस में 32 यात्री सवार थे। आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को अपना सामान तक निकालने का मौका नहीं मिला। हालांकि, राहत की बात रही कि सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

धमाके जैसी आवाज के बाद फैली आग

हादसा शाम करीब 5:30 बजे सेक्टर-148 के पास हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बस में अचानक धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और इसके बाद आग तेजी से फैलने लगी। कंडक्टर के शोर मचाने पर यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। यात्री जान बचाने के लिए बस से बाहर निकलने लगे। कई लोगों ने अपना सामान वहीं छोड़ दिया। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और बस जलकर राख हो गई।

बस का नंबर BR28P3433 बताया गया है। यह बस दिल्ली के लाल किले से बिहार के मुजफ्फरपुर जा रही थी। बस का संचालन जमना ट्रेवेल्स द्वारा किया जा रहा था और इसका रजिस्ट्रेशन गोपालगंज RTO में है।

दमकल ने पाया आग पर काबू

सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग बुझाई। शुरुआती तौर पर इंजन में शॉर्ट सर्किट को आग की संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। ग्रेटर नोएडा के ADCP अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि बस में सवार सभी 32 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

12 दिन में दूसरी चलती बस में आग

इस हादसे ने 12 दिन पहले हुए यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड की याद ताजा कर दी। 24 सितंबर को दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में भीषण आग लग गई थी। उस हादसे में 9 यात्रियों की मौत हुई थी, जबकि करीब 26 लोगों ने बाहर निकलकर जान बचाई थी। उस मामले में यात्रियों ने बस में आग लगने से पहले जलने की गंध आने का दावा किया था। आरोप था कि चालक और परिचालक को इसकी जानकारी देने के बावजूद बस समय पर नहीं रोकी गई। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान बस संचालन कंपनी के मैनेजर को गिरफ्तार भी किया था।

लगातार दो घटनाओं के बाद अब सबसे बड़ा सवाल स्लीपर बसों की सुरक्षा और फिटनेस व्यवस्था को लेकर उठ रहा है।

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