उत्तर प्रदेशलखनऊ

भतीजों की सियासत पर लगा ब्रेक… मायावती का बड़ा फैसला,अब कौन संभालेगा BSP की कमान?

मायावती ने आकाश और ईशान आनंद को बसपा की बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखने का फैसला किया। परिवारवाद के बजाय योग्यता को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

 BSP Chief Mayawati: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने पार्टी की भविष्य की राजनीति और परिवार की भूमिका को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनके भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद और ईशान आनंद को भविष्य में पार्टी की बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इस ऐलान के बाद बसपा में नई पीढ़ी के नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

परिवारवाद पर मायावती का स्पष्ट संदेश

मायावती ने अपने विस्तृत सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बसपा का मुख्य उद्देश्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय के आंदोलन को आगे बढ़ाना है। उनके मुताबिक पार्टी में जिम्मेदारी किसी पारिवारिक रिश्ते के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता, क्षमता और संगठन के प्रति योगदान के आधार पर मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर परिवारवाद पार्टी के मूल मिशन में बाधा बनता है तो वह इसे स्वीकार नहीं करेंगी। मायावती ने अपने फैसले को बसपा संस्थापक कांशीराम की उस राजनीतिक सोच से जोड़ा, जिसमें आंदोलन को पारिवारिक हितों से ऊपर रखा गया था।

आकाश के बाद ईशान पर भी फैसला

आकाश आनंद को मायावती ने एक समय संगठन में युवा चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया था और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिली थीं। हालांकि बाद में उन्हें इन दायित्वों से हटा दिया गया। इसके बाद उनके छोटे भाई ईशान आनंद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हुईं। अब मायावती ने दोनों भतीजों को पार्टी की भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों से दूर रखने की नीति स्पष्ट कर दी है। इससे बसपा के अगले नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

दीपिका के लिए खुला रास्ता

मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार की बेटी दीपिका आनंद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उन्हें पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए उनकी ईमानदारी, क्षमता और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को आधार बनाया जाएगा। दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं।

निष्कासित नेताओं की वापसी पर भी सफाई

मायावती ने बसपा से निष्कासित नेताओं और कार्यकर्ताओं की वापसी से जुड़ी चर्चाओं को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता या पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बाहर किए गए लोगों को वापस लेने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आकाश और ईशान से दूरी बनाने के बाद बसपा अपनी अगली पीढ़ी का नेतृत्व किसे सौंपेगी। आने वाले समय में यह फैसला उत्तर प्रदेश की सियासत में बसपा की दिशा पर अहम असर डाल सकता है।

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