UP Crime News: उत्तर प्रदेश की कानपुर के रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में रहने वाले दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या की साजिश के आरोप में जेल भेजी गई बहू शालू की 21 दिन बाद सोमवार शाम को रिहाई हो गई। जेल से बाहर आई शालू ने कहा,‘मैं शुरू से ही कह रही थी कि मैंने कुछ नहीं किया, मैं निर्दोष हूं।' आज वही प्रूफ हुआ। जब उनसे पूछा गया कि उनके पति सुब्रत ने उन्हें क्यों फंसाया, इस सवाल पर शालू ने कहा कि ‘मैं अभी कुछ नहीं कहना चाहती हूं, क्योंकि अभी मुझे एक ही पक्ष मालूम है। सुब्रत ने क्या कहा, मैं नहीं जानती, क्योंकि मैं जेल में थी।’ इसके आगे शालू ने कहा कि सबसे पहले बेटे से मिलना है। ससुर के बैड डच के सवाल पर साधी चुप्पी जब शालू से पूछा गया कि क्या कुछ समय बाद कानपुर लौटना होगा, क्योंकि आपके ससुर का बड़ा व्यापार है। इस पर शालू ने कहा कि वह अब कानपूर नहीं जाएगी। पति का ससुर से विवाद होता था, क्या कभी ऐसा लगा कि हत्या तक बात जा सकती है। इस पर शालू ने जवाब दिया, ‘थोड़ा बहुत नोकझोंक तो सभी फैमिली में होती है। हमारे यहां भी ऐसा ही था। हत्या जैसी वारदात हो जाएगी, ऐसा मैंने कभी नहीं सोचा था।’ आप सुब्रत को बहुत प्यार करती हैं लेकिन उसने ही फंसा दिया, क्या आपके संबंध अच्छे नहीं थी। इस सवाल पर शालू ने कहा, ‘संबंध अच्छे थे, इतना मनमुटाव नहीं था। परिवारों में पति-पत्नी के बीच जो विवाद होता है, वही हमारे यहां भी होता था।’ सुब्रत ने जेल जाते वक्त पिता के चरित्र पर सवाल उठाए थे, क्या वह सही हैं, क्या आप पहले से वाकिफ थीं। इस पर शालू ने कहा, ‘हां, सुब्रत ने गलत नहीं कहा है।' आपको लेकर भी बैड टच की बात सुब्रत ने कही थी, इस विषय पर शालू ने कोई भी बात नहीं की। बेटे से मिलने की इच्छा थी - शालू सुब्रत के पिता की हत्या का आरोप लगाने पर शालू ने कहा, 'मैं जेल में थी, मुझे कुछ नहीं पता। मैं खुद नहीं समझ पा रही उसने ऐसा क्यों किया। पुलिस कस्टडी रिमांड पर आमना सामना होने पर सुब्रत से आरोप लगाने के बारे में पूछा था तो उसने मना किया था। कहा था, मुझे यकीन है तुम ऐसा नहीं कर सकती हो।' 21 दिन बिना किसी अपराध जेल में पति की वजह से काटे। अब क्या करेंगी? इस पर शालू ने कहा,'मैने अभी तक कुछ नहीं सोचा है।' पुलिस कस्टडी में आपने बेटे से बात करने की इच्छा जतायी लेकिन बेटा ठीक से बात नहीं कर रहा था। इस पर शालू ने जवाब दिया कि बेटे से मिलने की इच्छा थी। जेल में हर पल उसे ही याद किया। उस दिन कस्टडी में पुलिस से बात करवाने की गुजारिश की थी। उन्होंने बात करायी लेकिन बेटा बात नहीं कर रहा था। बस उसका चेहरा देखना था। ये भी पढ़ें: 30 किलो चांदी चुराकर भागा कंप्यूटर इंजीनियर, कोर्ट में अर्जी देकर पूछा वारंट तो नहीं आई