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मोबाइल पर अचानक बजा ‘Extremely Severe Alert’! क्या है यह संदेश, क्यों आता है और कब शुरू हुई यह व्यवस्था?

मोबाइल पर दिख रहे "Extremely Severe Alert" संदेश हैकिंग नहीं, बल्कि भारत सरकार की आपदा चेतावनी प्रणाली का हिस्सा हैं। ये तेज आंधी, बारिश, ओलावृष्टि और मौसम संबंधी खतरों की जानकारी देते हैं।

Reported by Ravi and edited by Shagun Chaurasia

Extremely Severe Alert: पिछले कुछ समय से देश के कई राज्यों में लोगों के मोबाइल फोन पर अचानक तेज सायरन के साथ “Extremely Severe Alert” या गंभीर मौसम चेतावनी वाले संदेश दिखाई दे रहे हैं। कई लोगों ने इसे हैकिंग या तकनीकी गड़बड़ी समझा, लेकिन यह वास्तव में भारत सरकार की आपदा चेतावनी प्रणाली का हिस्सा है। इससे तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी जाती है, जो मौसम संबंधी आपदा अलर्ट है।

क्या है यह ‘Extremely Severe Alert’?

यह सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम (CBS) के माध्यम से भेजा जाने वाला आपातकालीन संदेश है। इसका उद्देश्य किसी क्षेत्र में आने वाली प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदा की जानकारी लोगों तक तुरंत पहुंचाना है। यह संदेश मोबाइल नेटवर्क के जरिए सीधे फोन स्क्रीन पर दिखाई देता है और कई बार साइलेंट मोड में भी तेज अलार्म बजाता है।

यह मैसेज कब और क्यों आता है?

सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियां यह अलर्ट तब जारी करती हैं जब किसी क्षेत्र में:

तेज आंधी-तूफान की संभावना हो

भारी बारिश या ओलावृष्टि का खतरा हो

बिजली गिरने की आशंका हो

बाढ़, चक्रवात, भूकंप या सुनामी जैसी स्थिति बन रही हो

किसी अन्य बड़े सार्वजनिक खतरे की सूचना देनी हो

इस सिस्टम का मकसद क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को समय रहते सचेत कर जान-माल के नुकसान को कम करना है। सामान्य SMS की तुलना में Cell Broadcast तकनीक अधिक प्रभावी मानी जाती है क्योंकि यह एक साथ किसी विशेष क्षेत्र के लाखों मोबाइल फोन तक कुछ ही सेकंड में संदेश पहुंचा सकती है।

भारत में इसकी शुरुआत कब हुई?

भारत में इस तकनीक का परीक्षण वर्ष 2023 में शुरू हुआ था। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और दूरसंचार विभाग (DoT) ने अगस्त 2023 से देशभर में परीक्षण संदेश भेजने शुरू किए थे।

इसके बाद 2 मई 2026 को केंद्र सरकार ने स्वदेशी तकनीक पर आधारित सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। यह प्रणाली C-DOT, दूरसंचार विभाग (DoT), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और गृह मंत्रालय के सहयोग से विकसित की गई है।

कैसे काम करती है यह तकनीक?

यह प्रणाली मोबाइल टावरों के माध्यम से किसी निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ संदेश भेजती है। इसके लिए इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती और नेटवर्क पर अधिक दबाव होने की स्थिति में भी संदेश पहुंच सकता है।

क्या ऐसे अलर्ट आने पर घबराने की जरूरत है?

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि संदेश में मौसम या आपदा संबंधी चेतावनी दी गई है तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए और सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। वहीं यदि संदेश में स्पष्ट रूप से “Test Message” लिखा हो तो वह केवल सिस्टम की जांच के लिए होता है और घबराने की आवश्यकता नहीं होती।

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