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पोस्टमार्टम हाउस में कर्मचारी की पिटाई का आरोप, कांस्टेबल पर लात-घूंसों से मारने की शिकायत

शव रखने के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी करने को कहने पर विवाद बढ़ा; कर्मचारियों ने काम रोका, परिजनों के हंगामे के बाद करीब चार घंटे चली बातचीत से मामला शांत हुआ


KANPUR NEWS : कानपुर के पोस्टमार्टम हाउस में सोमवार देर रात उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब शव लेकर पहुंचे एक जीआरपी कांस्टेबल पर वहां तैनात कर्मचारी के साथ मारपीट करने का आरोप लगा। कर्मचारी का आरोप है कि उसने शव रखने से पहले जरूरी प्रार्थना पत्र मांगा था, जिसके बाद कांस्टेबल नाराज हो गया और गाली-गलौज करते हुए उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। घटना के बाद पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने काम बंद कर कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। पोस्टमार्टम हाउस कर्मचारी कल्लू के मुताबिक घटना रात करीब 1:20 बजे की है। वह परिसर में सो रहा था। इसी दौरान जीआरपी कांस्टेबल मंगला प्रसाद एक शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। दरवाजा खटखटाए जाने पर कल्लू ने बाहर आकर जानकारी ली। कांस्टेबल ने अपना परिचय देते हुए बताया कि फतेहपुर निवासी रिशू नाम के युवक का शव पोस्टमार्टम हाउस में रखवाने के लिए लाया गया है।


कर्मचारी के अनुसार, शव रखने की प्रक्रिया के तहत उसने कांस्टेबल से पोस्टमार्टम प्रभारी के नाम प्रार्थना पत्र देने को कहा। आरोप है कि इसी बात को लेकर कांस्टेबल भड़क गया। बातचीत जल्द ही विवाद में बदल गई और कांस्टेबल ने कथित तौर पर गाली-गलौज शुरू कर दी। कल्लू का आरोप है कि इसके बाद उसे थप्पड़ मारे गए और जमीन पर गिराकर लातों से पीटा गया।

शोर सुनकर परिसर में रहने वाले गंगा प्रसाद मौके पर पहुंचे और दोनों के बीच बचाव कराया। कर्मचारी ने आरोप लगाया कि मारपीट के बाद कांस्टेबल ने उसे फर्जी मुकदमे में फंसाने और जेल भेजने की धमकी भी दी। घटना के बाद पीड़ित कर्मचारी ने मामले की शिकायत स्वरूप नगर थाने में करने की बात कही।


मारपीट की जानकारी सामने आने के बाद पोस्टमार्टम हाउस के अन्य कर्मचारियों में भी नाराजगी बढ़ गई। कर्मचारियों ने काम रोक दिया और आरोपी कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। काम रुकने से पोस्टमार्टम की प्रक्रिया प्रभावित हुई और वहां अपने परिजनों के शवों का इंतजार कर रहे लोगों की परेशानी बढ़ने लगी। मामले की जानकारी पोस्टमार्टम प्रभारी डॉ. विपुल चतुर्वेदी ने सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी को दी। इसके बाद जीआरपी इंस्पेक्टर ओम नारायण सिंह भी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने पीड़ित कर्मचारी से घटना की जानकारी ली और कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया।

बताया गया कि जीआरपी इंस्पेक्टर, पोस्टमार्टम प्रभारी और पीड़ित कर्मचारी के बीच कई दौर में बातचीत हुई। इस दौरान कर्मचारियों की मुख्य मांग आरोपी कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई को लेकर थी। दूसरी ओर, पोस्टमार्टम प्रक्रिया बंद रहने के कारण शवों के परिजन भी काफी देर तक इंतजार करते रहे।

दोपहर करीब दो बजे तक जब पोस्टमार्टम शुरू नहीं हुआ तो वहां मौजूद मृतकों के परिजन आक्रोशित हो गए। उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया और जल्द से जल्द पोस्टमार्टम कराने की मांग की। इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। करीब चार घंटे तक चली बातचीत के बाद दोपहर लगभग 2:30 बजे दोनों पक्षों के बीच समझौता होने की बात सामने आई। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई। हालांकि, कर्मचारी के साथ कथित मारपीट को लेकर शिकायत और कार्रवाई का मुद्दा जांच के दायरे में है।

पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यह है कि शव रखने की सामान्य प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिर मारपीट तक कैसे पहुंच गया। अब पुलिस और संबंधित विभाग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि घटना में वास्तव में क्या हुआ और आरोपी कांस्टेबल के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

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