Thermal Power Plants: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के लिए कंपनियों को दी गई जमीन पर वर्षों बाद भी परियोजना शुरू नहीं हो सकी। अनुबंध की शर्तों का पालन न करने पर शासन ने अब करीब 635 हेक्टेयर जमीन वापस ऊर्जा विभाग के नाम दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे पावर प्लांट के नाम पर लंबे समय से अटकी सरकारी और निजी जमीन के निस्तारण का रास्ता साफ हुआ है। थर्मल प्लांट के लिए जमीन दरअसल, थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए जिले में कुल 944.029 हेक्टेयर जमीन कंपनियों को उपलब्ध कराई गई थी। इसमें 308 हेक्टेयर ग्राम सभा की जमीन पहले ही वापस ली जा चुकी है। शेष भूमि में पावर प्लांट स्थापित करने के लिए मेसर्स लैंको अनपरा पावर लिमिटेड और मेसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को जमीन दी गई थी। 28 जून 2011 को हुआ था करार ऊर्जा विभाग और दोनों कंपनियों के बीच 28 जून 2011 को परियोजना के लिए अनुबंध हुआ था। अनुबंध के मुताबिक जमीन मिलने के तीन वर्ष के भीतर पावर प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा किया जाना था। इसके बावजूद निर्धारित अवधि तो दूर, करीब 15 साल बीतने के बाद भी परियोजना पर काम शुरू नहीं हो सका। नोटिस का भी नहीं दिया जवाब अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर शासन ने 25 मई 2026 को दोनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनियों को 15 दिन में जवाब देना था। नोटिस पंजीकृत डाक और ई-मेल से भेजे गए, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी कंपनियों की ओर से कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके बाद शासन ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए जमीन वापस लेने का निर्णय किया। कंपनियों ने लिया था 1500 करोड़ का कर्ज मामले में यह भी सामने आया कि कंपनियों ने परियोजना के लिए करीब 1500 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, लेकिन पावर प्लांट का काम शुरू नहीं किया। शर्तों का उल्लंघन होने पर कंपनियों पर कार्रवाई का शिकंजा कस गया है। डीएम को जमीन का नाम राजस्व अभिलेखों में तत्काल दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों कंपनियों को दी गई थी जमीन मेसर्स लैंको अनपरा पावर लिमिटेड को भोगनीपुर तहसील के कुछ गांवों में करीब 375.378 हेक्टेयर जमीन आवंटित की गई थी। इसमें 90.3260 हेक्टेयर पट्टा और 285.0524 हेक्टेयर अधिग्रहीत भूमि शामिल थी। वहीं मेसर्स हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को अमिलिया, सिहारी, कछगांव और चपरघटा में कुल 568.651 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई गई थी। इसमें 217.813 हेक्टेयर पट्टा और 350.838 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल थी। शासन के निर्देश के बाद अब जमीन को ऊर्जा विभाग के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे वर्षों से लंबित पावर प्लांट परियोजना के लिए आरक्षित जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। ये भी पढ़ें: थार के बोनट पर चढ़े समर्थक तो सांसद ने जोड़ लिए हाथ, बोले- गाड़ी टूट जाएगी बेटा, पैसे नहीं हैं