उत्तर प्रदेशकानपुर

पिता और 3 बेटियों की एक साथ अंतिम विदाई, चार अर्थियां देख फफक पड़ा पूरा गांव

रविवार को कच्चा मकान गिरने से जान गंवाने वाले मुकेश और उनकी तीन बेटियों की अर्थियां एक साथ उठीं। चारों को अंतिम विदाई देने के लिए गांव के लोग बड़ी संख्या में जुटे। घर से अर्थियां निकलते ही चीख-पुकार मच गई।

Kanpur News: कानपुर के घाटमपुर के हिरनी गांव में सोमवार की सुबह बेहद गमगीन रही। रविवार को कच्चा मकान गिरने से जान गंवाने वाले मुकेश और उनकी तीन बेटियों की अर्थियां एक साथ उठीं। चारों को अंतिम विदाई देने के लिए गांव के लोग बड़ी संख्या में जुटे। घर से अर्थियां निकलते ही चीख-पुकार मच गई। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था।ग्रामीणों ने चारों शवों को कंधा दिया और अंतिम संस्कार के लिए यमुना नदी किनारे मूसानगर घाट की ओर रवाना हुए। हिरनी गांव से घाट की दूरी करीब 32 किलोमीटर है। यहां चारों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

 अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए परिजन

परिजनों ने सोमवार सुबह अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। परिवार की मांग थी कि प्रशासन की ओर से पहले तत्काल आर्थिक मदद और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद तहसीलदार ओमप्रकाश गांव पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपए की तत्काल सहायता दी। प्रशासन की ओर से शवों को घाट तक ले जाने के लिए वाहन, लकड़ी और अन्य व्यवस्थाएं कराने का भरोसा भी दिया गया। इसके बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ।

हादसे के बाद DM पहुंचे गांव

रविवार देर शाम कानपुर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह भी हिरनी गांव पहुंचे थे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिया।परिजनों ने बताया कि हादसे के बाद उनके सामने रहने और परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। डीएम ने पीएम आवास और आर्थिक सहायता दिलाने के साथ नौकरी से संबंधित प्रक्रिया पूरी कराने का आश्वासन दिया।

घायल काजल को 16 लाख की राहत

हादसे में परिवार की बेटी काजल उर्फ लक्ष्मी घायल हुई है। प्रशासन के मुताबिक उसे दैवीय आपदा राहत कोष से 16 लाख रुपए की सहायता दी जानी है। मलबे में काजल की पासबुक और दूसरे जरूरी कागजात दब जाने के कारण राहत राशि उसके खाते में भेजने में दिक्कत आ रही थी। प्रशासन ने अब स्कूल के माध्यम से काजल का आधार कार्ड और बैंक खाते से संबंधित जानकारी जुटा ली है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद राहत की रकम उसके खाते में भेजी जाएगी।

चार अर्थियां देखकर रो पड़े ग्रामीण

मुकेश के पिता दारा सिंह के पैतृक घर से सोमवार सुबह चारों शवों को बाहर निकाला गया। चारों अर्थियां कफन और फूलों से ढकी थीं। एक साथ चार शवों को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। महिलाएं जमीन पर बैठकर रोती रहीं। परिजनों के साथ गांव के लोगों ने भी अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया। कई ग्रामीण अर्थियों को कंधा देने के लिए आगे आए, हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। जिस घर से चार अर्थियां निकलीं, वहां अब सन्नाटा है। मुकेश की बाइक अभी भी मकान के मलबे में दबी हुई है। ग्रामीणों के बीच हादसे को लेकर लगातार चर्चा होती रही। गांव के कई घरों में सोमवार सुबह चूल्हे तक नहीं जले। हर तरफ घटना को लेकर दुख और शोक का माहौल है।

मूसानगर घाट पर होगा अंतिम संस्कार

चारों शव मूसानगर घाट पहुंच चुके हैं। यमुना किनारे अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। परिजन और ग्रामीणों की मौजूदगी में पिता मुकेश और उनकी तीन बेटियों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

ये भी पढ़ें: करोड़पति दवा कारोबारी हत्याकांड का खुलासा, नौकर ने साथी संग मिलकर रेता गला

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Translate »