भारतीय शेयर बाज़ार ने गुरुवार को दमदार शुरुआत करते हुए निवेशकों को राहत की बड़ी वजह दी। पिछले कई हफ्तों से वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दबाव में चल रहे बाजार में अचानक नई ऊर्जा देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते ने निवेशकों की चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया, जिसका सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर दिखाई दिया। बाजार खुलते ही बीएसई सेंसेक्स ने मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया और शुरुआती घंटों में 77,400 के करीब पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को सेंसेक्स लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,978 अंक पर बंद हुआ था। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 ने भी तेजी का सिलसिला जारी रखते हुए 24,100 का अहम स्तर पार कर लिया और कारोबार के दौरान 24,211 अंक तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। यही वजह रही कि व्यापक बाजार भी मजबूती के साथ आगे बढ़ा। निफ्टी नेक्स्ट 50 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ। कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने बढ़ाया उत्साह बाजार में सकारात्मक माहौल बनाने में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने लगी है। इससे वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी चिंताएं कम हुईं और ब्रेंट क्रूड की कीमतें युद्ध से पहले के स्तरों की ओर लौटने लगीं। तेल की कीमतों में नरमी का सबसे अधिक फायदा ऑटोमोबाइल, एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिला। ईंधन लागत घटने की उम्मीद से इन क्षेत्रों के शेयरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जिससे बाजार की तेजी को और बल मिला। युद्धविराम ने खत्म किया ‘रिस्क प्रीमियम’ पिछले कुछ समय से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम का माहौल बना हुआ था। निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे थे, जिससे उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ रहा था। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते ने इस जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया है। विश्लेषकों के अनुसार, जैसे ही युद्ध की आशंकाएं कमजोर हुईं, संस्थागत निवेशकों ने फिर से इक्विटी बाजार में रुचि दिखानी शुरू कर दी। इसका फायदा भारतीय शेयर बाजार को भी मिला, जहां निवेशकों का भरोसा लौटता नजर आया। घरेलू निवेशकों ने संभाली बाजार की कमान विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। 24 जून को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब 3,637 करोड़ रुपये का निवेश किया। दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने लगभग 1,843 करोड़ रुपये की निकासी की। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार घरेलू निवेश ने बाजार को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। यदि यही रुझान आगे भी जारी रहता है, तो बाजार में मजबूती बनी रह सकती है। एक्सपायरी डे पर बढ़ सकती है हलचल गुरुवार का दिन बाजार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बीएसई सेंसेक्स साप्ताहिक ऑप्शंस की एक्सपायरी है। आमतौर पर एक्सपायरी के दिन कारोबार के अंतिम घंटों में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक दोपहर 2 बजे से 3:15 बजे के बीच बाजार में तेज हलचल देखने को मिल सकती है। ऑप्शंस ट्रेडर्स अपनी पोजीशन को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय रहेंगे, जिससे इंडेक्स में अचानक तेजी या गिरावट दोनों की संभावना बनी रहेगी। आगे क्या रहेगा बाजार का रुख? फिलहाल तकनीकी संकेतकों और बाजार की व्यापक स्थिति को देखते हुए निकट अवधि का रुझान सकारात्मक दिखाई दे रहा है। निफ्टी 24,100 के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल रहा है, जो निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। हालांकि कुछ जोखिम अब भी बने हुए हैं। देश में मानसून सामान्य स्तर से काफी कमजोर चल रहा है, जिससे कृषि और ग्रामीण मांग पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की हालिया टिप्पणी ने बैंकिंग और ब्याज दरों से जुड़े शेयरों को राहत दी है। उन्होंने संकेत दिया है कि फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी। इससे निवेशकों को यह भरोसा मिला है कि निकट भविष्य में मौद्रिक नीति अपेक्षाकृत सहायक बनी रह सकती है। फिलहाल बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के रुझान और एक्सपायरी डे की गतिविधियों पर बनी हुई है। यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और घरेलू निवेशकों का समर्थन जारी रहता है, तो बाजार आने वाले दिनों में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।