Ram Mandir Trust: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी और दो प्रमुख पदाधिकारियों के इस्तीफों के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि इस पूरे नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन है। ताजा जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसियों को बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका के संकेत भी मिले हैं, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हेराफेरी की नई कड़ी सूत्रों के अनुसार, मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की राशि की गिनती के बाद उसे बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में कुछ बैंककर्मी भी शामिल थे। आरोप है कि नकदी को पैक करने और बैंक में जमा कराने के दौरान रकम में हेराफेरी की जाती थी। बताया जा रहा है कि कथित तौर पर चोरी की गई राशि का हिसाब-किताब बैंक परिसर में किया जाता था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस पूरे खेल में अंदरूनी मिलीभगत तो नहीं थी। गिनती टीम पर सवाल जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती प्रतिदिन दो शिफ्टों में की जाती थी। इस प्रक्रिया में मंदिर कर्मियों, ट्रस्ट से जुड़े लोगों, ऑडिट टीम और बैंक प्रतिनिधियों की भूमिका रहती थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकदी के संग्रहण से लेकर बैंक में जमा होने तक किस स्तर पर अनियमितताएं हुईं। इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए अधिकांश आरोपी चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच में सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि कुछ लोगों ने लंबे समय तक दानराशि में गड़बड़ी कर निजी लाभ उठाया। कड़ियों को जोड़ने में लगी एजेंसियां प्रदेश सरकार ने मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। ये भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़, चंपत राय और अनिल मिश्रा ने मंदिर ट्रस्ट से दिया इस्तीफा