Israel Presidential Award: इजरायल ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार को उनकी असाधारण बहादुरी के लिए सम्मानित करने का फैसला किया है। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हाईजैक की कोशिश के दौरान मछार ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। उनकी सूझबूझ और साहस ने विमान में सवार करीब 174 यात्रियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने गुरुवार को कैप्टन मछार को नागरिक वीरता पदक देने की घोषणा की। फिलहाल वह अबू धाबी के अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। उनके स्वस्थ होने के बाद उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। खतरे में पड़ गई थी यात्रियों की जान जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान कॉकपिट में अचानक हमला हुआ। आरोप है कि ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने कैप्टन मछार पर क्रैश एक्स से हमला कर विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस दौरान विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह तेजी से नीचे आने लगा। कुछ ही समय में स्थिति बेहद गंभीर हो गई। बहादुरी से बचीं जानें गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मछार ने साहस बनाए रखा। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की और इसमें सफल रहे। इसके बाद विमान में मौजूद छह इजरायली नागरिकों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। अन्य पायलटों के सहयोग से हालात संभाले गए और विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार लिया गया। छह इजरायली नागरिकों को भी मिला सम्मान राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने येरुशलम में इस घटना के दौरान साहस दिखाने वाले छह इजरायली नागरिकों को नागरिक वीरता पदक प्रदान किया। इनमें ताली मानेस, ज्विका मानेस, यानिव हायुन, डॉ. शोता मुसायेव, आसाफ राजुआन और ओर पारदिलोव शामिल हैं। हर्जोग ने कैप्टन मछार के साहस, पेशेवर कौशल और सूझबूझ की सराहना करते हुए उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। अबू धाबी में चल रहा इलाज कैप्टन स्मित मछार फिलहाल अबू धाबी में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी उनकी हालत में सुधार की जानकारी दी है। घटना की जांच की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि संकट की घड़ी में साहस, धैर्य और जिम्मेदारी कितनी अहम होती है। कैप्टन मछार के सम्मान का ऐलान उनकी बहादुरी और विमान में सवार लोगों की जान बचाने के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय पहचान देता है। ये भी पढ़ें: 3 साल, 1 लाख स्ट्राइक और 74 हजार मौतें… कहां पहुंची इजराइल-हमास जंग?