उत्तर प्रदेशनोएडा

गांव के रास्ते पर कब्जे का आरोप, कैंडल मार्च निकालकर ग्रामीणों ने CM योगी से लगाई गुहार

नोएडा के मोमनाथल गांव में पुराने रास्ते को बचाने की मांग तेज! ग्रामीणों ने कैंडल मार्च निकालकर प्राधिकरण और भूटानी ग्रुप पर कब्जे की कोशिश का आरोप लगाया।

Noida Momanathal Village: नोएडा के सेक्टर-150 में पुराने रास्ते को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। मोमनाथल गांव के ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक रास्ते को सुरक्षित रखने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका आरोप है कि गांव के पुराने रास्ते पर कब्जे की कोशिश की जा रही है। इस विवाद को लेकर ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे अपने रास्ते को बचाने के लिए आवाज उठाते रहेंगे।

पुराने रास्ते को बचाने के लिए सड़क पर उतरे ग्रामीण

मोमनाथल गांव में निकाले गए कैंडल मार्च के जरिए ग्रामीणों ने प्रशासन तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया। उनका कहना है कि पुराना रास्ता गांव के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है और इसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि रास्ते पर कब्जा होने से गांव के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी चिंता के चलते उन्होंने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया और सरकार से इस मामले का समाधान निकालने की मांग की।

प्राधिकरण और भूटानी ग्रुप पर लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने नोएडा प्राधिकरण और भूटानी ग्रुप पर मिलीभगत से पुराने रास्ते पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गांव के रास्ते को किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, ये आरोप ग्रामीणों की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में नोएडा प्राधिकरण और भूटानी ग्रुप का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में विवाद से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

मुख्यमंत्री योगी से हस्तक्षेप की मांग

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि मामले की जांच कराकर गांव के पुराने रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांग पर समाधान नहीं निकलता, वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे। ग्रामीणों ने जरूरत पड़ने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी है।

अब प्रशासन के रुख पर टिकी निगाहें

मोमनाथल गांव के पुराने रास्ते को लेकर उठे इस विवाद में अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। क्या ग्रामीणों की मांग पर प्राधिकरण कोई कदम उठाएगा? क्या पुराने रास्ते को सुरक्षित रखने को लेकर कोई समाधान निकलेगा? फिलहाल, इन सवालों के जवाब का इंतजार है।

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