उत्तर प्रदेशनोएडा

नोएडा सेक्टर-150 में लेआउट प्लान पर बवाल, किसानों ने प्राधिकरण से मांगा जवाब

नोएडा सेक्टर-150 के एससी-01 लेआउट प्लान पर किसानों का विरोध, 12 मीटर सड़क और आबादी की जमीन गायब होने का आरोप। तीन से चार हजार ग्रामीण प्रभावित होने की आशंका।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Noida Authority: नोएडा के सेक्टर-150 में एससी-01 भूखंड के संशोधित लेआउट प्लान को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। भारतीय किसान यूनियन टिकैत और मोमनाथन से जुड़े किसानों ने सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के जनसुनवाई केंद्र में धरना देकर विरोध जताया। किसानों का आरोप है कि नए प्लान में गांव की 12 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और आबादी की जमीन को शामिल नहीं किया गया है। इससे हजारों ग्रामीणों के सामने परेशानी खड़ी होने की आशंका है।

15 साल पुरानी सड़क को प्लान से बाहर रखने पर सवाल

किसानों के मुताबिक, गांव की मुख्य सड़क पिछले करीब 15 वर्षों से मौजूद है। नोएडा प्राधिकरण कई बार इसका निर्माण भी करा चुका है। सड़क के आसपास सीवर और पानी की निकासी की व्यवस्था भी है। इसके बावजूद संशोधित लेआउट प्लान में सड़क को जगह नहीं दिए जाने पर किसानों ने नाराजगी जताई।

ग्रामीणों का दावा है कि योजना में सड़क और आबादी वाली जमीन को खाली दिखाया गया है। उनका कहना है कि इससे गांव के करीब तीन से चार हजार लोग प्रभावित हो सकते हैं। किसानों को आशंका है कि यदि जमीन की वास्तविक स्थिति को प्लान में दर्ज नहीं किया गया, तो उनके घरों और आवागमन के रास्तों पर असर पड़ सकता है।

किसानों ने की प्लान की दोबारा समीक्षा की मांग

किसानों ने प्राधिकरण से संशोधित लेआउट प्लान की समीक्षा करने और मौके पर मौजूद सड़क व आबादी की जमीन की स्थिति को रिकॉर्ड में सही तरीके से शामिल करने की मांग की। उनका कहना है कि योजना तैयार करते समय जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

आश्वासन के बाद खत्म हुआ धरना

नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान किसानों से बातचीत की गई। उनकी समस्याओं को सुनकर समाधान का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद किसान धरने से उठ गए। गौरतलब है कि सेक्टर-150 का एससी-01 भूखंड स्पोर्ट्स सिटी परियोजना का हिस्सा है। प्राधिकरण इस भूखंड के संशोधित लेआउट प्लान पर आई कुल 225 आपत्तियों का निस्तारण कर चुका है।

अब किसानों की मांग है कि गांव की सड़क और आबादी की जमीन को भी योजना में सही तरीके से दर्शाया जाए। सवाल यह है कि संशोधित प्लान में जमीनी स्थिति को लेकर उठी आपत्तियों पर प्राधिकरण क्या कदम उठाएगा और क्या ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान हो पाएगा?

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