MLC Election Results: उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद सीटों के नतीजों ने सियासी तस्वीर बदल दी है। बीजेपी को कई बड़े नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों में झटका लगा, जबकि योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर में पार्टी ने कांटे की टक्कर में जीत दर्ज की। दूसरी ओर, सपा के प्रदर्शन ने उत्तर प्रदेश में नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। योगी के गोरखपुर में कांटे की टक्कर विधान परिषद चुनाव के नतीजों में बीजेपी के लिए सबसे राहत भरी खबर गोरखपुर से आई। यहां पार्टी के उम्मीदवार ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को 307 वोटों से हराया। ध्रुव त्रिपाठी को 14,887 वोट मिले, जबकि राजीव यादव के खाते में 14,580 वोट आए। मतगणना के दौरान दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। आखिरकार बीजेपी इस सीट को बचाने में सफल रही। वाराणसी में सपा की लगातार दूसरी जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी को झटका लगा। वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के लाल बिहारी यादव ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 वोटों से हराया। लाल बिहारी यादव को 11,612 वोट मिले, जबकि प्रमोद मिश्रा को 6,597 वोटों से संतोष करना पड़ा। नितिन नवीन के क्षेत्र में भी बीजेपी को झटका बिहार के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू के नीरज कुमार ने आरजेडी के दिलीप राय को हराया। इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प रहा और जन सुराज के अनुज सिंह भी चुनावी चर्चा में रहे। नतीजे ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में राजनीतिक समीकरणों पर सवाल खड़े किए। नागपुर में कांग्रेस ने फिर मारी बाजी महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। उन्होंने दिसंबर 2020 में भी इस सीट पर जीत दर्ज की थी। नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ-साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। ऐसे में कांग्रेस की जीत को बीजेपी के लिए अहम झटके के तौर पर देखा जा रहा है। सपा की बढ़त ने बढ़ाई बीजेपी की चिंता उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों के चुनाव में सपा का प्रदर्शन चर्चा में रहा। उपलब्ध नतीजों के अनुसार, बीजेपी ने छह सीटें जीतीं, जबकि सपा चार सीटों पर विजयी रही और एक पर आगे बताई गई। सपा ने आगरा और लखनऊ की स्नातक सीटों पर भी जीत दर्ज कर अपनी स्थिति मजबूत की। आगामी चुनावों पर असर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षकों, वकीलों, डॉक्टरों और प्रोफेसरों जैसे मतदाताओं की भूमिका अहम होती है। ऐसे में इन नतीजों को केवल सीटों की जीत-हार तक सीमित नहीं माना जा रहा। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इन नतीजों का असर आगामी चुनावों की रणनीति पर भी पड़ेगा? बीजेपी के लिए कई प्रभावशाली क्षेत्रों में मिली हार आत्ममंथन का संकेत है, जबकि सपा इसे अपनी बढ़ती राजनीतिक ताकत के रूप में देख सकती है। ये भी पढ़ें: अब पार्टी कार्यकर्ताओं को खुद करनी पड़ रही निगरानी… अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला