उत्तर प्रदेश

आजम खां के बाद अब जौहर ट्रस्ट पर ED की नजर! परिवार के इन सदस्यों तक पहुंच सकती है जांच, बढ़ेंगी मुश्किलें?

आजम खां के बाद अब ईडी की नजर जौहर ट्रस्ट पर है। पत्नी, बेटों और बहन की भूमिका की जांच तेज, 400 करोड़ के खर्च पर उठे सवाल।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Azam Khan ED Action: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच अब जौहर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों तक पहुंचती नजर आ रही है। ट्रस्ट में आजम खां के परिवार के कई सदस्य शामिल रहे हैं। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ने पर उनकी पत्नी, दोनों बेटों और बहन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड भी एजेंसी के सवालों के घेरे में आ सकते हैं। हालांकि, किसी सदस्य के खिलाफ आरोप साबित होना अभी बाकी है।

जौहर ट्रस्ट पर ईडी की नजर

ईडी ने 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को भी शामिल किया है। इसी ट्रस्ट के माध्यम से जौहर विश्वविद्यालय का निर्माण कराया गया था। एजेंसी की जांच विश्वविद्यालय के निर्माण में कथित तौर पर सरकारी धन के इस्तेमाल, फर्जी फर्मों से चंदा लेने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर केंद्रित है।

ट्रस्ट में आजम परिवार के पांच सदस्य

आजम खां ने वर्ष 1990 में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की स्थापना की थी। वह इसके संस्थापक अध्यक्ष बने थे। शुरुआती कार्यकारिणी में उनकी पत्नी तजीन फातिमा को सचिव, बहन निकहत अफलाक को कोषाध्यक्ष और दोनों बेटों अदीब व अब्दुल्ला को सदस्य बनाया गया था। ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों में मुश्ताक अहमद सिद्दीकी उपाध्यक्ष, चमरौवा के सपा विधायक नसीर अहमद खां संयुक्त सचिव और सलीम कासिम सदस्य थे। इस तरह कुल नौ सदस्यों वाले ट्रस्ट में पांच लोग आजम खां के परिवार से जुड़े थे।

ईडी का आरोप है कि ट्रस्ट के कुछ अन्य सदस्यों की भूमिका केवल औपचारिक थी। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि ट्रस्ट के फैसले कैसे लिए जाते थे और इसके वित्तीय लेनदेन में किसकी क्या भूमिका थी।

सजा के बाद बदला गया ट्रस्ट का ढांचा

दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में सजा सुनाए जाने के बाद आजम खां ने ट्रस्ट से अपना, पत्नी और छोटे बेटे का नाम हटवा दिया था। इसके बाद ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी में उनकी बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष और बड़े बेटे अदीब को सचिव बनाया गया। नई कार्यकारिणी में मुश्ताक अहमद सिद्दीकी, नसीर अहमद खां, जावेद उर रहमान खान, मुमताज बी और शहरेयार सलीम को भी शामिल किया गया। अब ईडी की जांच में ट्रस्ट के पुराने और मौजूदा पदाधिकारियों की भूमिका अहम मानी जा रही है।

400 करोड़ रुपये के खर्च पर उठे सवाल

ईडी की ओर से दर्ज प्राथमिकी में जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, कमीशनखोरी और करीब 400 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब न होने जैसे आरोप लगाए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि इन आरोपों से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य जांच में सामने आए हैं। इसी सिलसिले में ट्रस्ट के सदस्य और चमरौवा के विधायक नसीर अहमद खां से पूछताछ की जा चुकी है। ट्रस्ट के कुछ अन्य सदस्यों ने भी एजेंसी के सामने कथित तौर पर यह शिकायत रखी कि उन्हें बैठकों में शामिल नहीं किया जाता था।

किसानों की जमीन से शुरू हुई थी जांच

जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए किसानों की जमीन पर कथित कब्जे का मामला ईडी की जांच की शुरुआती कड़ियों में शामिल है। एजेंसी के प्रेस वक्तव्य के मुताबिक, जुलाई 2019 में रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की गई थी। इन मुकदमों में आरोप लगाया गया था कि सिंगनखेड़ा गांव के किसानों की कृषि भूमि विश्वविद्यालय के लिए जबरन कब्जाई गई। किसानों को धमकाने, हमला करने और अवैध रूप से बंधक बनाकर जमीन के बैनामे कराने के आरोप भी लगाए गए थे।

ईडी की जांच में यह आरोप भी शामिल है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए आवंटित धन और सामग्री का इस्तेमाल विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। सरकारी ठेके हासिल करने वाले ठेकेदारों से रकम लेकर उसे ट्रस्ट को चंदे के रूप में लौटाने की आशंका भी जताई गई है।

अब किन लोगों से हो सकती है पूछताछ?

अजीमनगर थाने में 13 अक्टूबर 2026 को दर्ज प्राथमिकी के अलावा रामपुर में लूट, वसूली, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े 28 अन्य मुकदमों को भी जांच में शामिल किया गया है। अब ईडी ट्रस्ट के पुराने पदाधिकारियों, मौजूदा सदस्यों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। आजम खां और उनके छोटे बेटे अब्दुल्ला कई मामलों में अभियुक्त रह चुके हैं। वहीं, परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका को लेकर जांच जारी है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि जौहर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड और विश्वविद्यालय निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ईडी का अगला कदम क्या होगा?

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