Ayodhya Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला की निजी जिंदगी भी अब चर्चा का विषय बन गई है। जांच के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक, अविनाश ने चोरी की रकम से अपनी एक महिला मित्र को महंगा मोबाइल फोन और करीब ढाई लाख रुपये उपहार में दिए थे। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच शादी की बातचीत भी चल रही थी, लेकिन गिरफ्तारी के बाद यह रिश्ता टूटने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस या दोनों परिवारों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। महंगे गिफ्ट का राज अविनाश शुक्ला राम मंदिर में चढ़ावे की गणना से जुड़े कार्य में तैनात था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से सबसे अधिक करीब 20.39 लाख रुपये बरामद किए गए थे। पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को अतिरिक्त रकम और उसके खर्च से जुड़े कई अहम सुराग मिले। इसी दौरान यह भी पता चला कि उसने अपनी महिला मित्र को बड़ी रकम और महंगा मोबाइल फोन दिया था। जांच अधिकारी अब इन लेनदेन को भी पूरे मामले की महत्वपूर्ण कड़ी मानकर जांच कर रहे हैं। चोरी की रकम छिपाने का खेल इस बीच पुलिस की कस्टडी रिमांड पर लिए गए अन्य तीन आरोपी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेयने भी पूछताछ में कई अहम जानकारियां दी हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि चोरी की रकम सीधे अपने पास रखने के बजाय रिश्तेदारों और करीबी लोगों के खातों में भेजी जाती थी। बाद में वही रकम अलग-अलग माध्यमों से वापस उनके खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी, ताकि पैसों का वास्तविक स्रोत छिपाया जा सके और किसी को संदेह न हो। 30 बैंक खाते फ्रीज जांच के दौरान बैंक खातों की पड़ताल में कई संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। पुलिस ने आरोपियों और उनके परिजनों से जुड़े करीब 30 बैंक खातों को फिलहाल फ्रीज कर दिया है। इन खातों में आय के मुकाबले अधिक राशि के लेनदेन पाए गए हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है। पूछताछ में आरोपियों ने यह भी बताया कि चोरी की गई नकदी और जेवरों का बंटवारा 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित एक बाग में किया जाता था। पुलिस ने आरोपियों को मौके पर ले जाकर घटनास्थल का सत्यापन भी कराया। इससे पहले अविनाश शुक्ला ने भी इसी स्थान के बारे में जानकारी दी थी। बड़े खुलासों की आशंका सूत्रों के अनुसार, आरोपियों का मानना था कि वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे। इसी वजह से वे लंबे समय तक बेखौफ होकर चढ़ावे की रकम में हेराफेरी करते रहे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें मंदिर में नौकरी ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली लोगों की सिफारिश के आधार पर मिली थी। जांच में कुछ अन्य नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की पड़ताल जारी है। फिलहाल पुलिस चोरी की पूरी रकम, जेवर और अन्य संपत्तियों की बरामदगी के प्रयास में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड और आरोपियों के बयानों के आधार पर जांच लगातार आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। ये भी पढ़ें: फर्जी रसीद से करोड़ों की ठगी, दान के पैसों से खरीदीं जमीनें और लग्जरी गाड़ियां! राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में बड़ा खुलासा