Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनके अंतिम विदाई समारोह में लाखों लोगों की मौजूदगी ने दुनिया का ध्यान खींचा, लेकिन इससे कहीं ज्यादा चर्चा उन प्रमुख राजनीतिक चेहरों की गैरमौजूदगी की रही, जो वर्षों तक ईरान की सत्ता और राजनीति के केंद्र में रहे। इस घटनाक्रम ने देश की राजनीतिक एकजुटता और भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई के बेटे **मुज्तबा खामेनेई** अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। बताया गया कि सुरक्षा कारणों से उन्होंने सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि, परिवार के अन्य सदस्य अंतिम विदाई के दौरान मौजूद रहे। कई पूर्व राष्ट्रपति नहीं पहुंचे अंतिम संस्कार के दौरान ईरान के कई पूर्व राष्ट्रपतियों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी, हसन रूहानी और महमूद अहमदीनेजाद मुख्य दफन कार्यक्रम में नजर नहीं आए। माना जाता है कि इन नेताओं के खामेनेई के साथ समय-समय पर राजनीतिक मतभेद रहे थे।हालांकि, महमूद अहमदीनेजाद अंतिम यात्रा के जुलूस में पहले दिखाई दिए थे, लेकिन मशहद में हुए दफन कार्यक्रम से उनकी दूरी ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए। लंबे समय बाद सार्वजनिक रूप से उनकी मौजूदगी पहले ही चर्चा का विषय बनी थी। राजनीतिक संदेश पर उठे सवाल विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम संस्कार ईरान के लिए राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश देने का बड़ा अवसर था। लेकिन कार्यक्रम में केवल मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े नेताओं की प्रमुख मौजूदगी और कई प्रभावशाली पूर्व नेताओं की अनुपस्थिति ने इस संदेश को कमजोर कर दिया। ईरान मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि सुधारवादी और पूर्व शीर्ष नेताओं को भी प्रमुख भूमिका दी जाती तो देश की राजनीतिक एकता की मजबूत तस्वीर दुनिया के सामने रखी जा सकती थी। इसके विपरीत, समारोह को सीमित दायरे में रखने का फैसला कई तरह की राजनीतिक अटकलों को जन्म दे रहा है। दुनिया को क्या संदेश देना चाहता था ईरान? विश्लेषकों के अनुसार, ईरानी नेतृत्व इस अंतिम संस्कार के माध्यम से यह दिखाना चाहता था कि सर्वोच्च नेता के निधन के बाद भी शासन व्यवस्था पूरी तरह स्थिर और सक्रिय है। विशाल जनसमूह और व्यवस्थित आयोजन इसी संदेश का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि कई प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी यह संकेत देती है कि सत्ता प्रतिष्ठान अब भी आंतरिक राजनीतिक संतुलन और सुरक्षा को लेकर सतर्क है। यही वजह है कि अंतिम संस्कार का आयोजन मुख्य रूप से वर्तमान नेतृत्व और उसके करीबी लोगों तक सीमित दिखाई दिया। खामेनेई के अंतिम संस्कार ने जहां लाखों लोगों की मौजूदगी के साथ भावनात्मक माहौल बनाया, वहीं कई बड़े नेताओं की अनुपस्थिति ने ईरान की राजनीति, सत्ता संतुलन और भविष्य की दिशा को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। ये भी पढ़ें: तेहरान में जनसैलाब का तूफान! खामेनेई की अंतिम यात्रा बनी ऐतिहासिक भीड़