उत्तर प्रदेशनोएडा

जेल में कैदियों ने किया कमाल! उगा डाली 681 क्विंटल से ज्यादा सब्जियां, पूरे UP में हो रही सप्लाई

नोएडा की लुक्सर जिला जेल में 82 बंदी 21.50 एकड़ में सब्जियां उगा रहे हैं। एक वर्ष में 681 क्विंटल से अधिक उपज उत्तर प्रदेश की अन्य जेलों में भेजी गई।

Noida Jail News: गौतमबुद्ध नगर के लुक्सर स्थित जिला कारागार से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो जेल की पारंपरिक छवि से बिल्कुल अलग है। यहां सजा काट रहे बंदी अब केवल समय नहीं बिता रहे, बल्कि खेती के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। जेल परिसर में उगाई जा रही ताजा सब्जियां न सिर्फ कैदियों के भोजन का हिस्सा बन रही हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश की कई अन्य जेलों तक भी पहुंच रही हैं।

खेती से आत्मनिर्भरता

जेल अधीक्षक बृजेश कुमार ने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान लुक्सर जिला कारागार से 681 क्विंटल 90 किलोग्राम सब्जियां प्रदेश के विभिन्न जिलों की जेलों में भेजी गई हैं। यह पहल बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि जेल परिसर में करीब 21.50 एकड़ भूमि पर सब्जियों की खेती की जा रही है। इस कार्य में वर्तमान में 82 बंदी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। खेती के दौरान उन्हें श्रम, अनुशासन और टीमवर्क का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलता है, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और रिहाई के बाद रोजगार के नए अवसर भी तैयार होते हैं।

रोज़ चार क्विंटल उत्पादन

जेल परिसर में मौसम के अनुसार कई तरह की सब्जियां उगाई जा रही हैं। इनमें आलू, फूलगोभी, पत्तागोभी, पालक, गाजर, मूली, गांठगोभी, लौकी, तोरई, भिंडी, कद्दू, अरबी, टमाटर, शलजम और बैंगन जैसी फसलें शामिल हैं। इन सब्जियों की नियमित देखभाल और उत्पादन का जिम्मा भी बंदी ही संभालते हैं।
जेल प्रशासन के अनुसार, प्रतिदिन औसतन करीब चार क्विंटल ताजी सब्जियों का उत्पादन हो रहा है। सबसे पहले इनका उपयोग जिला कारागार में बंद कैदियों के भोजन के लिए किया जाता है। इसके बाद बची हुई उपज प्रदेश की अन्य जेलों में भेजी जाती है, जिससे वहां भी ताजी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

पुनर्वास की नई पहल

जेल अधीक्षक का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल सब्जियों का उत्पादन करना नहीं, बल्कि बंदियों को सकारात्मक और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। खेती के माध्यम से उन्हें ऐसा व्यावसायिक कौशल सिखाया जा रहा है, जो रिहाई के बाद उनके लिए आजीविका का साधन बन सके। यह पहल सुधार, आत्मनिर्भरता और पुनर्वास की दिशा में जिला कारागार का एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है।

ये भी पढ़ें: बारिश के बाद जमीन फटी! D-Mart साइट के पास 30 फीट धंसी सड़क, टला बड़ा हादसा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Translate »