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झारखंड में सरकार झुकी, आंदोलन थमा…लेकिन खत्म नहीं हुआ विवाद!

हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाएं रद्द कर जांच के आदेश दिए। आंदोलन खत्म हुआ, लेकिन CBI जांच, नियुक्तियों, एज रिलैक्सेशन और JPSC पर सवाल अब भी कायम हैं।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Ranchi Student Protest: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहा छात्र आंदोलन सरकार के बड़े ऐलान के बाद फिलहाल थम गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के साथ TDPL एजेंसी से कराई गई परीक्षाओं को भी निरस्त करने की घोषणा की है। साथ ही 2014 से अब तक हुई भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की व्यापक जांच के निर्देश दिए गए हैं।

CBI मांग कायम

सरकार के इस फैसले के बाद भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो, उम्मे हबीबा और राहुल क्रांति ने अनशन समाप्त कर दिया। हालांकि, आंदोलन का एक गुट अब भी CBI जांच की मांग पर अड़ा है। ऐसे में सरकार की घोषणा के बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा।

JSSC-CGL पास अभ्यर्थियों का क्या होगा?

JSSC-CGL रद्द होने का सबसे बड़ा पेच उन अभ्यर्थियों को लेकर है, जिन्होंने परीक्षा पास कर चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है। कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति भी मिल चुकी है। अब सवाल है कि उनकी नियुक्ति का क्या होगा? क्या उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी या सरकार कोई अलग व्यवस्था करेगी? यह मामला अदालत तक पहुंचने की संभावना भी रखता है, क्योंकि परीक्षा रद्द होने से पहले चयनित और नियुक्त अभ्यर्थियों के अधिकार सीधे प्रभावित होंगे।

CBI जांच पर अब भी सहमति नहीं

छात्रों की प्रमुख मांगों में CBI जांच शामिल रही है। सरकार ने फिलहाल CID/SIT जांच और 2014 से अब तक की भर्ती परीक्षाओं की पड़ताल की बात कही है। लेकिन आंदोलनकारी सवाल उठा रहे हैं कि जब मामला कई वर्षों और अलग-अलग एजेंसियों तक फैला है, तो जांच केंद्रीय एजेंसी को क्यों नहीं सौंपी जा रही? यही मांग आंदोलन के अगले चरण का कारण बन सकती है।

TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की पूरी तस्वीर साफ नहीं

सरकार ने TDPL से कराई गई परीक्षाओं को रद्द करने की बात कही है, लेकिन अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि इसकी जद में कौन-कौन सी परीक्षाएं आएंगी। परिणाम, चयन और नियुक्तियों पर इसका क्या असर पड़ेगा? दोबारा परीक्षा कब होगी? इन सवालों पर विस्तृत लिखित आदेश का इंतजार है।

11वीं-13वीं JPSC पर भी नजर

11वीं-13वीं JPSC को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। छात्रों का दावा है कि मेरिट तैयार करने की प्रक्रिया में TDPL की भूमिका रही थी। ऐसे में TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बीच इस परीक्षा का भविष्य क्या होगा, यह बड़ा सवाल है। वहीं 14वीं JPSC को रद्द करने का ऐलान सरकार पहले ही कर चुकी है।

उम्र सीमा में छूट का सवाल

भर्ती परीक्षाओं में देरी और बार-बार विवाद के कारण कई अभ्यर्थियों की उम्र निर्धारित सीमा के करीब पहुंच गई है। ऐसे में सिर्फ दोबारा परीक्षा कराने से समस्या हल नहीं होगी। पुराने उम्मीदवारों को मौका देने के लिए एज रिलैक्सेशन पर भी स्पष्ट फैसला जरूरी है।

2014 से जांच खुली तो बढ़ सकता है दायरा

मुख्यमंत्री के मुताबिक CID और SIT की जांच में अलग-अलग समय पर काम करने वाली कंपनियों के बीच एक जटिल नेटवर्क के संकेत मिले हैं। अब 2014 से हुई परीक्षाओं की जांच का दायरा कितना बड़ा होगा और पुरानी परीक्षाओं में गड़बड़ी मिलने पर नियुक्तियों का क्या होगा, यह सबसे बड़ा कानूनी पेच बन सकता है।

NEET से क्यों अलग है पूरा मामला?

झारखंड का विवाद किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। यहां JSSC, JPSC, अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं, आउटसोर्स एजेंसी और वर्षों पुरानी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इसलिए समाधान सिर्फ री-एग्जाम कराने से नहीं निकलेगा। सरकार को रद्द परीक्षाओं, पुरानी नियुक्तियों, उम्र सीमा, नई परीक्षा की प्रक्रिया और जांच की समयसीमा पर स्पष्ट रोडमैप देना होगा। यानी आंदोलन भले थम गया हो, लेकिन झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद की असली परीक्षा अब सरकार की अगली कार्रवाई में होगी।

ये भी पढ़ें: JPSC परीक्षा रद्द करने पर सहमत हुई हेमंत सरकार, रांची में छात्रों के आंदोलन की बड़ी जीत

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