Vinod Tawde: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की चुनावी कमान ऐसे नेता को सौंपी है, जिसका राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। कभी अपने ही गढ़ महाराष्ट्र में विधानसभा टिकट से वंचित हुए विनोद तावड़े आज बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक भाजपा की रणनीति के अहम चेहरे बन चुके हैं। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के ऐलान के बाद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। यूपी की जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव के साथ भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की चुनावी रणनीति बेहद अहम है। लोकसभा की 80 सीटों वाला यूपी पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में भी निर्णायक भूमिका रखता है। 2019 में कट गया टिकट विनोद तावड़े ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की थी। इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र भाजपा संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह विधान परिषद के सदस्य रहे और विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभाई। 2014 में उन्होंने बोरीवली विधानसभा सीट से चुनाव जीता और देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री बने। उनके पास शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, खेल और युवा मामलों जैसे महत्वपूर्ण विभाग रहे। लेकिन पांच साल मंत्री रहने के बावजूद 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। उनके स्थान पर सुनील राणे को उम्मीदवार बनाया गया। यह फैसला तावड़े के लिए बड़ा राजनीतिक झटका था। हालांकि, उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के बजाय संगठन में अपनी भूमिका मजबूत करने पर ध्यान दिया। महाराष्ट्र से दिल्ली तक बढ़ा कद 2019 के बाद तावड़े की राजनीतिक भूमिका महाराष्ट्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ने लगी। शुरुआत में उन्हें कोई बड़ी चुनावी जिम्मेदारी नहीं मिली, लेकिन बाद में पार्टी ने उनकी संगठनात्मक क्षमता का इस्तेमाल अलग-अलग राज्यों में किया। राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्हें भाजपा की चुनाव प्रबंधन समिति में सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद 2024 में वह भाजपा के सदस्यता अभियान से जुड़े और संगठन को जमीनी स्तर तक मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। बिहार में दिखा संगठनात्मक कौशल विनोद तावड़े को सबसे ज्यादा पहचान बिहार में पार्टी की जिम्मेदारी संभालने के दौरान मिली। चुनावी रणनीति, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाने में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया। बिहार के बाद अब भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े राजनीतिक मैदान की जिम्मेदारी दी है। तावड़े की कार्यशैली की खासियत यह मानी जाती है कि वह मीडिया की सुर्खियों से ज्यादा संगठन के भीतर जमीनी काम पर जोर देते हैं। अब यूपी में सबसे बड़ी परीक्षा यूपी में उनके सामने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं में बेहतर तालमेल बनाने और सहयोगी दलों के साथ समन्वय कायम रखने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी। महाराष्ट्र में टिकट कटने से लेकर राष्ट्रीय संगठन में अहम भूमिका और बिहार में चुनावी जिम्मेदारी तक का सफर बताता है कि भाजपा ने तावड़े की राजनीतिक वापसी को सिर्फ पद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें लगातार बड़ी जिम्मेदारियां सौंपती गई। अब यूपी की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक सफर की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक मानी जा रही है। ये भी पढ़ें: BJP ने तीन राज्यों में नियुक्त किए नए प्रभारी, UP की जिम्मेदारी संभालेंगे विनोद तावड़े, जाने पंजाब और गुजरात में कौन?