KANPUR NEWS। प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। सचेंडी पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो कथित तौर पर सामान्य अभ्यर्थियों को फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र दिलाकर आरक्षण का लाभ पहुंचाने और उनकी जगह परीक्षा में लेखक सहायक बैठाने का काम करता था। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जांच में लाखों रुपये के लेनदेन और कई प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, 22 अगस्त को भैलामऊ स्थित परीक्षा केंद्र पर IBPS की प्रोबेशनरी ऑफिसर एवं मैनेजमेंट ट्रेनी प्रारंभिक परीक्षा आयोजित हो रही थी। इसी दौरान कुछ अभ्यर्थियों और उनके साथ पहुंचे लेखक सहायकों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। पूछताछ में उनके जवाबों में विरोधाभास मिलने के बाद जांच आगे बढ़ाई गई, जिससे कथित फर्जीवाड़े के नेटवर्क की जानकारी सामने आई। परीक्षा केंद्र पर संदिग्ध गतिविधियों से खुला राज पुलिस के अनुसार, अवनीश यादव के लिए आशीष कुमार और अनुराधा कन्नौजिया के लिए बिहार निवासी राहुल कुमार सिन्हा लेखक सहायक बनकर परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। दोनों से पूछताछ के दौरान दस्तावेज और परीक्षा से संबंधित जानकारी को लेकर कई सवाल खड़े हुए, राहुल कुमार सिन्हा ने पूछताछ में बताया कि उसे अनुराधा के लिए अंकित सचान ने बुलाया था। इसके बाद पुलिस ने अंकित को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच आगे बढ़ने पर कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र और लेखक सहायक उपलब्ध कराने वाले लोगों का नेटवर्क सामने आने लगा। करीब एक लाख रुपये में बनवाया फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र पुलिस की पूछताछ में अवनीश यादव ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसने स्नातकोत्तर तक पढ़ाई की है। इसके बावजूद वर्ष 2025 में करीब एक लाख रुपये खर्च कर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने की बात सामने आई, पुलिस जांच में मनोज कुमार यादव के माध्यम से शमशेर उर्फ शीलू सचान से प्रमाणपत्र बनवाने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, अवनीश पहले भी दो परीक्षाओं में लेखक सहायक की मदद ले चुका था। 22 अगस्त की परीक्षा के लिए आशीष कुमार को कथित तौर पर 30 हजार रुपये दिए गए थे। पुलिस को उसके मोबाइल में भुगतान की रसीद और परीक्षा से संबंधित बातचीत भी मिली है। प्रेमिका को नौकरी दिलाने के लिए 10 लाख की कथित डील गिरफ्तार अंकित सचान से पूछताछ में भी पुलिस को कथित नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक, अंकित ग्रामीण बैंक में वसूली प्रबंधक है और वह एक युवती को दिव्यांग कोटे के जरिए नौकरी दिलाना चाहता था। जांच में सामने आया कि वर्ष 2024 में युवती का कथित तौर पर करीब 65 हजार रुपये खर्च कर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया गया। इसके बाद 22 अगस्त की परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए करीब 10 लाख रुपये में सौदा तय होने की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार, एडवांस के तौर पर 21 और 22 अगस्त को 10-10 हजार रुपये भेजे गए थे। मोबाइल और iPad से मिले परीक्षा से जुड़े दस्तावेज पुलिस ने राहुल कुमार सिन्हा के मोबाइल फोन और iPad की जांच में कई अहम सामग्री मिलने का दावा किया है। इनमें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रवेश पत्र, लेखक सहायक से संबंधित फॉर्म, प्रमाणपत्र और कथित लेनदेन से जुड़ी बातचीत शामिल बताई गई है। पूछताछ में राहुल ने पुलिस को बताया कि दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और ऑनलाइन पढ़ाने के दौरान उसकी पहचान ऐसे लोगों से हुई थी, जो कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों के लिए लेखक सहायक उपलब्ध कराते थे। कई अन्य लोगों के नाम जांच के घेरे में जांच के दौरान पुलिस के सामने शमशेर उर्फ शीलू सचान, मनोज कुमार यादव, सुरजीत कुमार, मनोरंजन, राजू गुप्ता, मनीष कुमार मिश्रा और राहुल यादव समेत कई अन्य नाम आने की बात कही गई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और इसके जरिए कितने अभ्यर्थियों को फर्जी प्रमाणपत्र या लेखक सहायक उपलब्ध कराया गया। साथ ही पूर्व में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसी तरीके से फर्जीवाड़े की आशंका की जांच की जा रही है। चार गिरफ्तार, कई सामान बरामद डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के अनुसार, परीक्षा केंद्र पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के बाद एसटीएफ और सचेंडी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी। पूछताछ और जांच के बाद अवनीश यादव, आशीष कुमार, राहुल कुमार सिन्हा और अंकित सचान को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन, एक iPad, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, दो एटीएम कार्ड, 2,750 रुपये नकद, परीक्षा से संबंधित दस्तावेज और कथित तौर पर इस्तेमाल की गई कार बरामद हुई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अब जांच का फोकस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इससे पहले हुई प्रतियोगी परीक्षाओं पर है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने अभ्यर्थियों को फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र और लेखक सहायक उपलब्ध कराए। ये भी पढ़ें : कानपुर RTO में बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर फिल्मी अंदाज में पुलिस ने की छापेमारी, 22 कथित दलाल हुए गिरफ्तार, बाबू के पास मिला अतिरिक्त कैश