Bahraich News: उत्तर प्रदेश में बहराइच के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में 27 अगस्त की सुबह वन विभाग ने दो अलग-अलग बचाव अभियानों में घड़ियाल और स्मूथ-कोटेड ऑटर, यानी ऊदबिलाव, को सुरक्षित बचाकर उनके प्राकृतिक वातावरण में पहुंचाया। नदी में तेज जलप्रवाह के बीच हुए इन रेस्क्यू ऑपरेशनों ने संभावित खतरे को टाल दिया। पहली सूचना तड़के कतर्नियाघाट रेंज से मिली। कौड़ियाला नदी के तेज बहाव में बहकर एक घड़ियाल सिंचाई विभाग के व्यस्त परिसर तक पहुंच गया था। परिसर में लोगों की आवाजाही होने के कारण वन विभाग के सामने वन्यजीव और आम लोगों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती थी। घड़ियाल को सुरक्षित नदी पहुंचाया सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सबसे पहले परिसर में मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर भेजा। इसके बाद क्षेत्र की बैरिकेडिंग की गई, ताकि किसी तरह की अफरा-तफरी न हो। टीम ने घड़ियाल को पकड़ने या चोट पहुंचाने वाली किसी आक्रामक तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया।सावधानीपूर्वक मार्गदर्शन करते हुए उसे वापस कौड़ियाला नदी की ओर ले जाया गया, जहां वह सुरक्षित रूप से पानी में लौट गया। बैराज पर ऑटर फंसा मिला घड़ियाल के रेस्क्यू के तुरंत बाद बैराज क्षेत्र से दूसरा एसओएस मिला। तेज बहाव में बहकर आया एक स्मूथ-कोटेड ऑटर बैराज के मुख्य ढांचे पर फंस गया था। उसके नीचे नदी का प्रवाह बेहद तेज था। आशंका थी कि यदि वह बहाव में आगे निकल गया तो वह अपने समूह से अलग हो सकता था और नदी किनारे के रिहायशी इलाकों तक पहुंचने का खतरा भी था। ऑटर को जंगल में छोड़ा वन टीम ने मौके पर पहुंचकर रणनीति के तहत जाल का उपयोग किया और ऊदबिलाव को सुरक्षित पकड़ लिया। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से बैग में रखकर जंगल स्थित उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में ले जाया गया। वहां उसे पुनः मुक्त कर दिया गया। वन विभाग के मुताबिक, घाघरा की ऊपरी धारा कौड़ियाला नदी का जलस्तर और बहाव फिलहाल तेज बना हुआ है। नेपाल में आई फ्लैश फ्लड का प्रभाग क्षेत्र पर अभी कोई प्रत्यक्ष असर दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन वनकर्मियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। नदी तटीय इलाकों की लगातार निगरानी की जा रही है। ये भी पढ़ें: मेडिकल स्टोर में लगी भीषण आग, दमकल टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू