उत्तर प्रदेश

UP में चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा दांव! आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 50% बढ़ाने की तैयारी

चुनावी साल में योगी सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का मानदेय 50 फीसदी बढ़ाने की तैयारी में है। प्रस्ताव मंजूर हुआ तो 3.56 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिलेगा।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

UP Elections 2027: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने दोनों के मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। प्रस्ताव लागू होने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मासिक मानदेय 8 हजार से बढ़कर 12 हजार रुपये और सहायिकाओं का 4 हजार से बढ़कर 6 हजार रुपये हो जाएगा।

3.56 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिलेगा फायदा

मानदेय बढ़ोतरी से प्रदेश की करीब 1.89 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 1.67 लाख सहायिकाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल में ही आंगनबाड़ी कर्मियों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करने की घोषणा की थी। इसके बाद संबंधित विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया। जानकारी के मुताबिक, प्रस्ताव पर वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग की सहमति मिल चुकी है। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

सरकार पर बढ़ेगा 3 हजार करोड़ से ज्यादा बोझ

मानदेय में प्रस्तावित वृद्धि से राज्य सरकार के खजाने पर सालाना 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का अनुमान है। इस अतिरिक्त खर्च को उत्तर प्रदेश सरकार खुद वहन करेगी। इसके लिए केंद्र से अलग वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी।

किसे कितना मिलेगा मानदेय?

फिलहाल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 8 हजार रुपये मिलते हैं। इसमें केंद्र का हिस्सा 4,500 और राज्य का 3,500 रुपये है। प्रस्ताव के तहत राज्य अपना योगदान बढ़ाकर 5,500 रुपये करेगा, जिससे कुल मानदेय 12 हजार रुपये हो जाएगा। सहायिकाओं का मानदेय भी 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपये करने का प्रस्ताव है।

चुनावी साल में महिला वोटरों पर फोकस

सरकार के इस संभावित फैसले को आर्थिक राहत के साथ चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की पहुंच गांवों से लेकर शहरों तक है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग के बीच यह फैसला लागू हुआ तो सरकार को महिला कल्याण और सशक्तीकरण के मोर्चे पर बड़ा राजनीतिक संदेश देने का मौका मिलेगा।

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