बुधवार, 2 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में सुबह से ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला। पिछले कारोबारी सत्र में हरे निशान पर बंद हुए बाजार ने आज पूरी तरह रुख बदल लिया, और वैश्विक तनाव का असर घरेलू निवेशकों की जेब पर सीधा पड़ता दिखा। कहां पहुंचे सेंसेक्स और निफ्टी बीएसई सेंसेक्स आज 76,471 के स्तर पर कमजोर खुला, जो पिछले बंद से करीब 473 अंक नीचे था। खुलते ही बाजार में बिकवाली और तेज हो गई, और कारोबार के दौरान सेंसेक्स 76,135 तक फिसल गया। सुबह करीब सवा ग्यारह बजे तक यह इंडेक्स 690 अंक यानी करीब 0.90% की गिरावट के साथ 76,254 के आसपास कारोबार कर रहा था। एनएसई निफ्टी की हालत भी कुछ अलग नहीं रही। यह इंडेक्स एक फीसदी से ज्यादा टूटकर 23,800 के स्तर तक पहुंच गया, जो निवेशकों के लिए चिंता की बात है क्योंकि यह मनोवैज्ञानिक रूप से अहम स्तर माना जाता है। बाजार का मिजाज साफ नकारात्मक रहा - बीएसई पर करीब 2,378 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल 1,347 शेयरों में बढ़त देखी गई। मिडकैप इंडेक्स सवा एक फीसदी और स्मॉलकैप करीब एक फीसदी टूटा, यानी छोटे और मझोले शेयरों में भी दर्द बराबर बंटा। डर के पैमाने इंडिया विक्स में भी तीन फीसदी से ज्यादा की उछाल दर्ज हुई, जो बताता है कि निवेशक सतर्क मोड में आ गए हैं। आखिर गिरावट की वजह क्या रही इस बिकवाली के पीछे मुख्य वजह विदेशी मोर्चे से आई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर भड़क उठा है, और इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया, जो पिछले करीब छह हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह खबर अच्छी नहीं है, क्योंकि महंगे कच्चे तेल का सीधा असर महंगाई और रुपये पर पड़ता है। इसके अलावा अमेरिका में बॉन्ड यील्ड भी 4.80% के आसपास पहुंच गई है, जो जनवरी 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों में पैसा लगाना उतना आकर्षक नहीं रह जाता। किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा असर ऑटो सेक्टर सबसे बड़ा हारा रहा, जिसमें करीब 3.26% की गिरावट दर्ज हुई। रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी शेयरों में भी एक फीसदी से ज्यादा की कमजोरी देखी गई। टॉप गेनर्स की बात करें तो कोल इंडिया ने 4.27% की छलांग लगाई। आईसीआईसीआई बैंक करीब सवा दो फीसदी, श्रीराम फाइनेंस दो फीसदी से ज्यादा और ओएनजीसी भी दो फीसदी के करीब मजबूत हुआ। इन्फोसिस और विप्रो जैसे आईटी दिग्गजों में भी करीब दो-दो फीसदी की बढ़त रही, वहीं बजाज ऑटो और एशियन पेंट्स भी हरे निशान पर टिके रहे। आगे निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए बाजार जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में तीन बातें दिशा तय करेंगी - पहला, अमेरिका-ईरान तनाव किस करवट बैठता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति पर कोई असर पड़ता है या नहीं। दूसरा, कच्चे तेल के दाम इसी स्तर पर टिके रहते हैं या और चढ़ते हैं। और तीसरा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का रुख आगे कैसा रहता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि इस उतार-चढ़ाव में जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें और अपने पोर्टफोलियो को लंबी अवधि के नजरिए से देखें। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें। आपकी क्या राय है - क्या यह गिरावट अस्थायी झटका है या आगे और गिरावट का संकेत? कमेंट में हमें बताएं।