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दिल्ली सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट सख्त! एक हफ्ते में सभी PG-हॉस्टलों का सेफ्टी ऑडिट

सत्य निकेतन हादसे पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त हुआ। MCD को एक सप्ताह में सभी PG-हॉस्टलों का सेफ्टी ऑडिट कराने और अधिकारियों से 10 दिन में जवाब मांगा।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Delhi High Court: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी सिर्फ भवन मालिकों तक सीमित नहीं की जा सकती। दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की भूमिका और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

DU की हॉस्टल सुविधा नाकाफी

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिय की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए DU के पास पर्याप्त हॉस्टल सुविधा नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों को मजबूरी में निजी PG और हॉस्टलों का सहारा लेना पड़ता है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खतरा बना रहता है।

एक सप्ताह में सेफ्टी ऑडिट का आदेश

हाई कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि राजधानी के सभी PG और हॉस्टलों का एक सप्ताह के भीतर सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि असुरक्षित इमारतों से होने वाली घटनाओं में केवल मकान मालिक को दोषी ठहराना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित सरकारी विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी जांची जानी चाहिए।

कोर्ट ने अधिकारियों से यह बताने को कहा है कि PG और हॉस्टलों को नियंत्रित करने के लिए कौन-कौन से नियम लागू हैं और उनका पालन किस तरह सुनिश्चित किया जा रहा है।

25 सितंबर को अगली सुनवाई

जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित एजेंसियों को 10 दिन के भीतर अलग-अलग हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। अदालत ने वैध भवन स्वीकृति, निर्माण से जुड़ी मंजूरियों और अधिकारियों की संभावित लापरवाही का पूरा विवरण भी मांगा है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जिन इमारतों के नक्शे सीमित मंजिलों के लिए मंजूर होते हैं, वे बाद में कई मंजिलों तक कैसे पहुंच जाती हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन पर भी सख्त निर्देश

हाई कोर्ट ने राहत और बचाव एजेंसियों से मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाने को कहा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र, दिल्ली सरकार, पुलिस और MCD लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और बचाव अभियान जारी है। अब अदालत का फोकस सिर्फ सत्य निकेतन हादसे तक सीमित नहीं है। PG और हॉस्टल व्यवस्था की निगरानी, निर्माण नियमों के पालन और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

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