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शेयर बाजार में आज हल्की गिरावट, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने बिगाड़ा मूड

17 अगस्त 2026 सोमवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और दिन भर सूचकांक लाल निशान के आसपास ही झूलते रहे। पश्चिम एशिया में तनाव की ताजा खबरों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिसका सीधा असर घरेलू बाजार के सेंटीमेंट पर दिखा।

कैसा रहा सूचकांकों का हाल

बाजार खुलते ही बीएसई सेंसेक्स करीब 116 अंक फिसलकर 77,892 के स्तर पर आ गया, जबकि पिछले सत्र में यह 78,009 पर बंद हुआ था। निफ्टी 50 भी 22 अंक की कमजोरी के साथ 24,343 पर खुला। दोपहर के कारोबार तक बिकवाली का दबाव और बढ़ गया सेंसेक्स करीब 286 अंक यानी 0.37 फीसदी टूटकर 77,722 के आसपास कारोबार करता दिखा, वहीं निफ्टी 24,300 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब आ गया।

चौड़े बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी हल्की गिरावट के साथ लाल निशान में रहे, हालांकि गिरावट सीमित रही, जो बताता है कि बड़े पैमाने पर पैनिक सेलिंग जैसा माहौल नहीं था।

किन सेक्टर्स पर रहा दबाव, किसने दी राहत

सेक्टोरल मोर्चे पर सबसे ज्यादा मार पीएसयू बैंक शेयरों पर पड़ी, जो निवेशकों की प्रॉफिट-बुकिंग का शिकार बने। दूसरी तरफ, ऑटो सेक्टर ने बाजार को सहारा दिया और दिन का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। शुरुआती कारोबार में बाजार की चौड़ाई (मार्केट ब्रेड्थ) सकारात्मक रही थी, एनएसई पर करीब 1,319 शेयर बढ़त में और 1,278 गिरावट में थे यानी बिकवाली एकतरफा नहीं थी, कई शेयरों में खरीदारी भी दिखी।

विदेशी निवेशकों का रुख

आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले सत्र में करीब 508 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी करीब 356 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यानी दोनों तरफ से खरीदारी का सिलसिला जारी रहा, जो लंबी अवधि में बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, भले ही अल्पावधि में गिरावट दिख रही हो।

वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत

एशियाई बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। जापान का निक्केई हल्की बढ़त में कारोबार करता दिखा, हांगकांग के हैंगसेंग में भी अच्छी तेजी देखी गई। दूसरी ओर, चीन का शंघाई कंपोजिट दबाव में रहा। दक्षिण कोरिया का बाजार आज अवकाश की वजह से बंद रहा। इस मिले-जुले वैश्विक रुझान के बीच ब्रेंट क्रूड के दाम 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास टिके रहना भी घरेलू बाजार के लिए चिंता की एक वजह बना, क्योंकि ऊंची तेल कीमतें भारत जैसे तेल आयातक देश की महंगाई और चालू खाता घाटे पर असर डाल सकती हैं।

आगे क्या?

बाजार जानकारों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक सूचकांकों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी बड़े फैसले से पहले वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए रखें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

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