Byjus Crisis || Byju Raveendran || Indian Edtech Collapse || Startup Ecosystem: एक समय भारतीय स्टार्टअप दुनिया का सबसे बड़ा चेहरा मानी जाने वाली BYJU'S आज कानूनी लड़ाइयों, भारी कर्ज और टूटते भरोसे के बीच अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। कभी ऑनलाइन शिक्षा की क्रांति लाने वाली यह एडटेक कंपनी अब भारत के कॉरपोरेट इतिहास की सबसे बड़ी विफलताओं में गिनी जा रही है। कैसे खत्म हुआ सफर साल 2011 में शुरू हुई कंपनी ने कोविड महामारी के दौरान जबरदस्त उछाल देखा। स्कूल बंद हुए तो ऑनलाइन पढ़ाई का बाजार तेजी से बढ़ा और विदेशी निवेशकों ने अरबों डॉलर झोंक दिए। 2022 तक कंपनी की वैल्यू 22 अरब डॉलर पहुंच गई। भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी से लेकर हर बड़े विज्ञापन तक Byju’s का दबदबा दिखाई देता था। लेकिन तेजी से विस्तार की यही दौड़ बाद में संकट बन गई। कंपनी ने अमेरिका सहित कई देशों में विस्तार करते हुए करीब 3 अरब डॉलर खर्च कर कई कंपनियां खरीद लीं। इसी दौरान विदेशी कर्जदाताओं से 1.2 अरब डॉलर का बड़ा लोन लिया गया। बाद में वित्तीय रिपोर्ट में भारी घाटा सामने आया और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे। करोड़ों डॉलर की रकम छिपाई स्थिति तब और बिगड़ी जब कर्जदाताओं ने कंपनी पर करोड़ों डॉलर की रकम इधर-उधर करने और संपत्तियां छिपाने के आरोप लगाए। अमेरिका से लेकर सिंगापुर तक कानूनी विवाद शुरू हो गए। सिंगापुर की अदालत ने कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन को अदालत के आदेशों की अनदेखी के मामले में छह महीने जेल की सजा सुनाई। निवेशकों के भरोसे में गिरावट भारत में भी मुश्किलें बढ़ती गईं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के बकाए भुगतान विवाद के बाद कंपनी के खिलाफ दिवालियापन प्रक्रिया शुरू हो गई। कर्मचारियों की छंटनी, महीनों तक वेतन में देरी और निवेशकों के भरोसे में गिरावट ने कंपनी की हालत और खराब कर दी। जो कंपनी कभी शिक्षा का भविष्य बदलने का दावा करती थी, आज वही दुनिया भर की अदालतों में खुद को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट का EC पर बड़ा फैसला, SIR प्रक्रिया वैध, चुनाव आयोग को पूरी छूट