उत्तर प्रदेशनोएडा

परी चौक से स्लीपर बस तक कैसे पहुंची 16 साल की छात्रा? गैंगरेप केस में नोएडा-दिल्ली पुलिस की जांच उलझी

ग्रेटर नोएडा में 16 वर्षीय छात्रा से स्लीपर बस में गैंगरेप का आरोप, नोएडा-Delhi पुलिस जांच में उलझी। ट्रैवल कंपनी ने सेक्टर-44 कार्यालय बंद किया, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Noida Crime News: ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा के साथ कथित गैंगरेप के मामले ने यात्री सुरक्षा और बसों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद नोएडा और दिल्ली पुलिस के बीच जांच को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। वहीं, जिस ट्रैवल कंपनी की बस से मामला जुड़ा बताया जा रहा है, उसने अपना सेक्टर-44 स्थित कार्यालय बंद कर दिया है।

परी चौक से बस तक

ग्रेटर नोएडा की बीटा-2 थाना पुलिस छात्रा के परी चौक तक पहुंचने और वहां से बस में सवार होने की परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि छात्रा किस रास्ते से वहां पहुंची और कितनी देर तक वहां मौजूद रही। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आशंका है कि छात्रा यमुना एक्सप्रेसवे पर किसी बस से उतरकर जीरो पॉइंट पहुंची और वहां से परी चौक आई हो। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि रास्ते में लगे कैमरों में उसकी गतिविधियां रिकॉर्ड हुई थीं या नहीं।

रात में स्लीपर बसों का जमावड़ा

परी चौक और कसाना क्षेत्र में स्लीपर बसों के रुककर यात्रियों को बैठाने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। ऑनलाइन टिकट बुकिंग के बाद यात्री इन बसों में सवार होते हैं। कई बसें दिल्ली के कश्मीरी गेट और आनंद विहार से चलकर एक्सप्रेसवे के रास्ते पूर्वांचल और बिहार तक जाती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि रात के समय इन बसों की नियमित जांच और यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।

पर्दे और टिंटेड ग्लास ने बढ़ाई मुश्किल

मामले ने स्लीपर बसों में लगे पर्दों और गहरे रंग के शीशों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। बताया जा रहा है कि जिस बस से घटना जुड़ी है, उसमें भी टिंटेड ग्लास और पर्दे मौजूद थे। इससे बस के अंदर की गतिविधियों पर बाहर से निगरानी रखना मुश्किल हो सकता है। एआरटीओ प्रवर्तन उदित नारायण के मुताबिक, डग्गामार बसों के खिलाफ जुलाई में अभियान चलाया गया था। इस दौरान 188 चालान किए गए और 117 वाहन बंद कराए गए।

ड्राइवर-कंडक्टर के सत्यापन पर भी सवाल

घटना के बाद बस चालक और परिचालक के पुलिस सत्यापन को लेकर भी सवाल उठे हैं। ऑनलाइन बुकिंग और जीपीएस जैसी सुविधाओं के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ड्राइवर-कंडक्टर की पृष्ठभूमि जांच और बसों की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी है, यह जांच का अहम हिस्सा बन गया है।

ट्रैवल कंपनी ने बंद किया कार्यालय

मामला सामने आने के बाद संबंधित ट्रैवल कंपनी ने नोएडा के सेक्टर-44, छलेरा स्थित अपना कार्यालय बंद कर दिया और बाहर लगा होर्डिंग भी हटा दिया। बताया गया है कि कंपनी इसी कार्यालय से दिल्ली-एनसीआर में बसों की देखरेख करती थी। अब जांच एजेंसियां छात्रा परी चौक तक कैसे पहुंची, बस में सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या रही, इन सवालों के जवाब तलाश रही हैं।

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