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तत्काल रोक नहीं! UPI चार्ज पर SC का बड़ा अपडेट, केंद्र-NPCI से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने UPI पर प्रस्तावित चार्ज पर तत्काल रोक से इनकार किया, लेकिन केंद्र, NPCI समेत संबंधित पक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होगी।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Supreme Court: 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। अदालत ने फिलहाल नई व्यवस्था पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार, UPI स्टीयरिंग कमेटी, NPCI और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका में नए MDR ढांचे की वैधता और इसे लागू करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।

सरकार ने चार्ज को लेकर क्या कहा?

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने बताया कि नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से प्रभावी होगी। सरकार के मुताबिक, करीब 96 फीसदी लेनदेन इस बदलाव के दायरे से बाहर रहेंगे। सरकार ने यह भी कहा कि MDR कोई टैक्स या सरकारी फीस नहीं है। इसके तहत मिलने वाली राशि केंद्र सरकार के पास नहीं जाएगी, बल्कि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल संबंधित संस्थाओं के बीच सेटलमेंट लागत के तौर पर होगी। पीठ ने इस संबंध में विस्तृत तथ्य हलफनामे के जरिए रखने को कहा।

₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर क्या बदलेगा?

NPCI के नए ढांचे के अनुसार, 15 अक्टूबर से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतान पर ₹2,000 से अधिक की राशि के लिए 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे ज्यादा के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा। Person-to-Person भुगतान इस व्यवस्था से बाहर हैं।
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे कुछ आवश्यक क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर ₹5 का फ्लैट MDR तय किया गया है। सरकारी जानकारी के अनुसार MDR सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा।

याचिका में क्या आपत्ति?

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि MDR लागू करने का फैसला पर्याप्त कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लिया गया। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की थी। फिलहाल अदालत ने अंतरिम रोक नहीं लगाई है। अब केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद मामले की आगे की सुनवाई होगी।

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