उत्तर प्रदेशराजनीति

रामपुर जेल में अखिलेश-आजम की मुलाकात से UP की सियासत में हलचल! क्या 2027 के लिए बनेगी नई रणनीति?

रामपुर जेल में अखिलेश यादव और आजम खां की मुलाकात पर नजरें! क्या 2027 चुनाव के लिए पश्चिमी यूपी की रणनीति, उम्मीदवारों और गठबंधन का नया फॉर्मूला तय होगा?

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

SP Election Strategy: रामपुर जेल में होने वाली एक मुलाकात पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में नए समीकरणों का संकेत दे सकती है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 22 अक्टूबर को जेल में बंद पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां से मुलाकात करेंगे। आधिकारिक तौर पर इस दौरे का उद्देश्य आजम खां की तबीयत का हाल जानना बताया जा रहा है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुलाकात के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों नेताओं के बीच पश्चिमी यूपी की चुनावी रणनीति पर भी चर्चा होगी?

पश्चिमी यूपी में आजम खां का प्रभाव क्यों अहम?

आजम खां लंबे समय से जेल में हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी में उनकी राजनीतिक अहमियत को लेकर चर्चाएं जारी हैं। मुरादाबाद मंडल से लेकर पश्चिमी यूपी के कई क्षेत्रों में उनका प्रभाव सपा की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी की 126 सीटों में से सपा-रालोद गठबंधन ने 41 सीटें जीती थीं। इनमें 33 सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सफल रहे थे। वहीं, मुरादाबाद मंडल की 27 सीटों में से 17 पर सपा ने जीत दर्ज की थी। इन नतीजों के मद्देनजर आगामी चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन और क्षेत्रीय समीकरणों पर आजम खां की राय महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, मुलाकात में किन विषयों पर चर्चा होगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जौहर यूनिवर्सिटी से संभल तक

आजम खां और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई सपा के संभावित चुनावी मुद्दों में शामिल हो सकती है। आजम खां के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की ओर से एक और एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में है। इसके अलावा संभल में हरिहर मंदिर और जामा मस्जिद से जुड़े विवाद, हिंसा तथा न्यायिक जांच रिपोर्ट को लेकर भी सपा का रुख चुनावी बहस का हिस्सा बन सकता है। पार्टी इन मुद्दों को किस तरह उठाती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

गठबंधन और सीटों का गणित भी अहम

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा के सामने सहयोगी दलों के साथ तालमेल बैठाने की चुनौती भी होगी। सपा और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन की स्थिति में सीटों का बंटवारा महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर दोनों दल अपनी राजनीतिक ताकत का दावा करते रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय समीकरण और चुनाव संचालन को लेकर आपसी सहमति अहम होगी।

क्या जेल से तय होगी पश्चिमी यूपी की चुनावी दिशा?

अखिलेश यादव की आजम खां से मुलाकात को लेकर पार्टी नेताओं और राजनीतिक जानकारों की निगाहें टिकी हैं। आजम खां की तबीयत का हाल जानने के साथ राजनीतिक बातचीत होना स्वाभाविक माना जा रहा है, लेकिन चर्चा का वास्तविक एजेंडा दोनों नेताओं को ही पता होगा। अब देखना होगा कि यह मुलाकात केवल व्यक्तिगत हालचाल तक सीमित रहती है या 2027 के चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में सपा की रणनीति को लेकर भी कोई अहम संकेत सामने आता है।

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