उत्तर प्रदेश

यूपी में SIR के बाद भी डुप्लीकेट वोटर! एक नाम पर 4 ID, चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उठे सवाल

यूपी में SIR के बाद भी डुप्लीकेट वोटर आईडी का मामला सामने आया। सपा ने 100 सीटों पर गड़बड़ी का दावा किया, चुनाव आयोग ने जांच की बात कही।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

UP SIR 2026: उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पूरी होने और फाइनल मतदाता सूची जारी होने के बाद भी डुप्लीकेट वोटर आईडी का मामला सामने आया है। समाजवादी पार्टी ने कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के नाम पर कई एंट्री होने का दावा किया है। वहीं, फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने भी एक व्यक्ति के नाम से कई वोटर आईडी जारी होने का मुद्दा उठाया। इसके बाद चुनाव आयोग की वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

 एक नाम कई बार दर्ज

13 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी ने यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को ज्ञापन सौंपा। पार्टी के मुताबिक, 100 विधानसभा क्षेत्रों की वोटर लिस्ट की जांच में कुछ जगह एक ही व्यक्ति का नाम दो, तीन और यहां तक कि 10 बार दर्ज मिला। सपा ने बूथवार उदाहरण और दस्तावेज सौंपते हुए ऐसी एंट्री की जांच कर डुप्लीकेट नाम हटाने की मांग की।

एक व्यक्ति के नाम पर चार वोटर आईडी का मामला

17 अक्टूबर को मोहम्मद जुबैर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक व्यक्ति के नाम से चार वोटर आईडी कार्ड बनने का मामला उठाया। उन्होंने यूपी के CEO की वेबसाइट पर मौजूद Form 9 रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि सुंदर नाम के व्यक्ति ने 6 जनवरी और 14 जनवरी को Form 6 के जरिए आवेदन किया था। उन्होंने सवाल किया कि आवेदन के स्तर पर ही डुप्लीकेट एंट्री की पहचान क्यों नहीं हो पाती।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक एक्स हैंडल ने जवाब में कहा कि संबंधित मतदाता ने दो नहीं, बल्कि चार आवेदन जमा किए थे। आयोग ने जुबैर से उनके दावे में बताए गए दो आवेदनों के रेफरेंस नंबर साझा करने को कहा।

हालांकि, आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि एक ही व्यक्ति के कई आवेदन जमा होने से अलग-अलग EPIC नंबर बनने की समस्या लंबे समय से मौजूद है। इसके लिए ECINET के माध्यम से समय-समय पर डुप्लीकेशन जांच की जाती है। आयोग का कहना है कि वह ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहा है, जो आवेदन के समय ही कई आवेदनों की पहचान कर सके।

SIR में कितने नाम घटे?

उत्तर प्रदेश में SIR की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी। 6 जनवरी 2026 की ड्राफ्ट सूची में करीब 12.55 करोड़ मतदाता थे, जबकि 10 अप्रैल 2026 को जारी अंतिम सूची में 13,39,84,792 मतदाता दर्ज किए गए। SIR से पहले लगभग 15.44 करोड़ मतदाता थे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना था, तो डुप्लीकेट एंट्री कैसे रह गईं? इन मामलों की जांच और सत्यापन से ही स्पष्ट होगा कि कितनी एंट्री वास्तविक गड़बड़ी हैं और कितने मामलों में अलग-अलग आवेदन के कारण कई EPIC नंबर बने।

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