Mayawati Statement: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने देश में बढ़ती राजनीतिक कटुता और नेताओं के बीच लगातार तेज हो रहे आरोप-प्रत्यारोप पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आपसी सम्मान और संवाद की मर्यादा बनाए रखना जरूरी है। व्यक्तिगत टिप्पणियों, अमर्यादित भाषा, जातिवादी सोच और हिंसक बयानों का बढ़ता चलन लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है। राजनीतिक मर्यादा की अपील मायावती के मुताबिक, राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध जताने के नाम पर भाषा का स्तर गिराना और एक-दूसरे के प्रति कटुता बढ़ाना देशहित में नहीं है। इससे न केवल देश की गरिमा प्रभावित होती है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा भी कमजोर हो सकता है। शीर्ष नेताओं को मर्यादा बनाए रखने की सलाह बसपा प्रमुख ने कहा कि ऊंचे संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी है कि वे सार्वजनिक संवाद में सम्मान और संयम बनाए रखें। नेताओं को ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए, जो राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बनाएं। उन्होंने आपत्तिजनक और विषैली बयानबाजी पर रोक लगाने की जरूरत बताई। मायावती के अनुसार, संकीर्ण स्वार्थ और गरीब-विरोधी सोच से प्रेरित राजनीति आम लोगों के हितों को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर होने का खतरा है। 1. भारतीय राजनीति में आपसी अविश्वास, द्वेष, कटूता, आरोप-प्रत्यारोप आदि का स्तर, गिरते-गिरते अब व्यक्तिगत स्तर पर भी काफी बेलगाम होकर असंसदीय, अमर्यादित, अपमानजनक, संकीर्ण व जातिवाद से ग्रसित होता हुआ, हिंसक बयानबाजी़ तक भी पहुँच जाना अति-दुखद तथा देश की गरिमा व मान-मर्यादा आदि के लिये भी अति-चिन्तनीय। 2. इतना ही नहीं बल्कि इससे बढ़कर शीर्ष स्तर पर भी आसीन लोगों के लिये एक-दूसरे के लिये अगर समुचित सम्मान नहीं तो आपत्तिजनक एवं विषैली राजनीति को अवश्य ही किसी भी प्रकार से बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिये, वरना ख़ासकर बढ़ती संकीर्ण व ग़रीब-विरोधी स्वार्थी राजनीति के प्रचलन के कारण लोगों का भरोसा यहाँ की राजनीतिक व्यवस्था पर कमज़ोर होना कतई भी देश व जनहित में नहीं होगा। 3. वैसे भी सरकारी स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार व चुनावी प्रक्रिया पर भी ऊंगली उठने के कारण जनता में पहले से ही काफी बेचैनी है और ऐसे में नेताओं के बीच आपस में नाक की लड़ाई स्थिति को और भी अधिक विषम बना रही है, जबकि जनता की चाहत देश की बढ़ती ग़रीबी, बेरोज़गारी व महंगाई आदि जैसी ज्वलन्त समस्याओं के निदान पर सभी का ध्यान केन्द्रित करने की है। 4. ऐसे में ख़ासकर सभी पार्टियों व उनके नेताओं के बीच अशोभनीय टीका-टिप्पणी व बयानबाजी का बढ़ता हुआ होड़ यहाँ राजनीतिक माहौल को और भी अधिक कड़वा व विषैला बनायेगा, जो अनुचित। सभी लोग इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दें तो यह बेहतर। — Mayawati (@Mayawati) October 27, 2026 भ्रष्टाचार और चुनावी प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल मायावती ने कहा कि सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नेताओं का आपसी टकराव राजनीतिक वातावरण को और खराब कर सकता है। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों को एक-दूसरे पर आरोप लगाने में अपनी ऊर्जा खर्च करने के बजाय जनता की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दे आम लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। सभी दलों से संयम बरतने की अपील बसपा प्रमुख ने राजनीतिक दलों और उनके नेताओं से सार्वजनिक बयानों में मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि अशोभनीय टिप्पणियों और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की बढ़ती प्रवृत्ति से समाज में कटुता बढ़ सकती है। मायावती का संदेश ऐसे समय में आया है, जब राजनीतिक बहस में भाषा और व्यक्तिगत आरोपों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि राजनीतिक दल सार्वजनिक संवाद में संयम बरतने और जनता के बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता देने की उनकी अपील पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं। ये भी पढ़ें: यूपी की 11 MLC सीटों पर मतगणना शुरू, आज खुलेगा 29 प्रत्याशियों की किस्मत का पिटारा