Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यशैली और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी जिम्मेदारी चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखना है। अखिलेश के मुताबिक, आयोग की साख कमजोर होने के कारण राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को खुद निगरानी करनी पड़ रही है। ‘आयोग को अपनी साख बचाकर रखनी चाहिए’ अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को अपने फैसलों और कामकाज के जरिए निष्पक्षता साबित करनी चाहिए। उनका आरोप है कि मौजूदा हालात में राजनीतिक दलों को चुनावी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए खुद आगे आना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आयोग की व्यवस्था पर भरोसा कायम है, तो कार्यकर्ताओं को लगातार निगरानी करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? #WATCH | Lucknow, Uttar Pradesh: At a press conference, SP Chief Akhilesh Yadav says, "... If the Election Commission were impartial and its decisions fair, we wouldn’t have to keep monitoring. As a constitutional body, it has a responsibility to protect its credibility. Political party workers are now having to monitor the process themselves... Muslim, Yadav and SP supporters were selectively removed from voter lists... Who was held accountable? Which official faced action?" — ANI (@ANI) October 27, 2026 बंगाल चुनाव का उदाहरण देकर उठाए सवाल सपा प्रमुख ने पश्चिम बंगाल के चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि कई लोगों को पहले मतदान करने से रोका गया, जबकि बाद में उनके वोट को सही बताया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अखिलेश ने यह भी कहा कि इन घटनाओं को लेकर कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई। हालांकि, मतदान से रोकने और बाद में वोट को सही बताए जाने से जुड़े उनके दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं। 2022 में वोट कटने का भी लगाया आरोप अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी ने ऐसे मतदाताओं के मामले सामने रखे, जिनके नाम 2019 में सूची में थे, लेकिन 2022 तक कट गए। सपा प्रमुख का आरोप है कि मुस्लिम, यादव और समाजवादी पार्टी के समर्थकों के वोट प्रभावित हुए। उन्होंने सवाल किया कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल अखिलेश यादव ने अपने आरोपों के जरिए चुनाव आयोग की जवाबदेही और निष्पक्षता पर बहस तेज कर दी है। उनके बयानों के केंद्र में मतदाता सूची, मतदान का अधिकार और शिकायतों पर कार्रवाई जैसे मुद्दे हैं। हालांकि, वोट कटने और चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। ये भी पढ़ें: फॉर्म-6 विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, EC के दावे की होगी जांच, जानिए CJI ने क्या कहा?