UP Government Jobs Rules: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। योगी सरकार ने नियुक्तियों में पात्रता और पुलिस जांच से जुड़े नियम स्पष्ट किए हैं। हिंसक तरीकों से व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाले संगठनों से जुड़े लोगों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जा सकता है। हालांकि, केवल राजनीतिक विचारधारा या एफआईआर दर्ज होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को स्वतः अपात्र नहीं किया जाएगा। हिंसक संगठनों से जुड़े लोगों पर क्या है नियम? प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक, हिंसक तरीकों से व्यवस्था बदलने का घोषित उद्देश्य रखने वाले संगठनों के सदस्यों को सरकारी नियुक्ति के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। यह नियम प्रदेश के विभिन्न विभागों, निगमों, परिषदों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों पर लागू होगा। हालांकि, किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा मात्र को उसकी अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह शासनादेश हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है। सिर्फ FIR दर्ज होने से नहीं रुकेगी नौकरी नई व्यवस्था में स्पष्ट किया गया है कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने का मतलब यह नहीं होगा कि उसे नौकरी से वंचित कर दिया जाए। अंतिम रूप से बरी होने, समझौते से निपटे मामलों और किशोर न्याय कानून के दायरे में आने वाले मामलों में भी स्वतः अयोग्यता लागू नहीं होगी। वहीं, हत्या, डकैती, दुष्कर्म, महिला की गरिमा भंग करने, भ्रष्टाचार, आतंकवादी गतिविधियों, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग जैसे गंभीर मामलों में संलिप्तता सामने आने पर अभ्यर्थी की पात्रता प्रभावित हो सकती है। सत्यापन लंबित है फिर भी मिल सकता है नियुक्ति पत्र चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट आने में देरी होने पर नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से नहीं रोकी जाएगी। अभ्यर्थी से स्व-घोषणा पत्र और निर्धारित दस्तावेज लेकर औपबंधिक नियुक्ति पत्र दिया जा सकेगा। हालांकि, यदि अभ्यर्थी गलत जानकारी देता है या जांच में अपात्र पाया जाता है, तो उसकी नियुक्ति तत्काल रद्द की जा सकती है। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी संभव होगी। पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का नए सिरे से चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा। पुलिस को 30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट नई व्यवस्था के तहत जिला पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को सत्यापन के लिए रिपोर्ट मिलने के 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट नियुक्ति प्राधिकारी को सौंपनी होगी। देरी होने पर गृह विभाग इसकी निगरानी करेगा। सत्यापन के दौरान पुलिस या एलआईयू अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ नहीं करेगी और न ही उसकी भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। यदि रिपोर्ट प्रतिकूल आती है, तो जिलाधिकारी अपनी संस्तुति देने से पहले अभ्यर्थी को ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से पक्ष रखने का अवसर देंगे। इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी नियुक्तियों में चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया को स्पष्ट करना और गंभीर मामलों में संलिप्तता तथा सामान्य आपराधिक आरोपों के बीच अंतर तय करना है। ये भी पढ़ें: राहुल गांधी का विपक्ष को खुला न्योता, रामलीला मैदान में 1 नवंबर को जुटेगा INDIA गठबंधन!