Supreme Court on Firecrackers: दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस साल भी ग्रीन पटाखों के सीमित इस्तेमाल की अस्थायी अनुमति दी है। हालांकि, इसके साथ कई शर्तें भी लगाई गई हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण फैलाने वाले पारंपरिक और गैर-प्रमाणित पटाखों पर पाबंदी जारी रहेगी। ग्रीन पटाखों पर सख्त शर्तें जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि पटाखों से वायु प्रदूषण होता है, लेकिन प्रतिबंध के बावजूद पारंपरिक पटाखों की अवैध बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में अदालत के मुताबिक, केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय ग्रीन पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी निगरानी जरूरी है। अदालत ने अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्कूलों, वृद्धाश्रमों और साइलेंस जोन के आसपास पटाखे जलाने पर रोक लगाई है। साथ ही, निर्धारित अवधि के बाद पटाखों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लागू होगा। प्रमाणित ग्रीन पटाखों को ही अनुमति कोर्ट के आदेश के मुताबिक, ग्रीन पटाखों का निर्माण केवल अधिकृत और प्रमाणित निर्माता ही कर सकेंगे। इनके पैकेट पर उत्पाद और बैच की जानकारी वाला QR कोड होना अनिवार्य होगा। बेरियम युक्त पटाखों, लड़ियों और गैर-प्रमाणित उत्पादों पर रोक रहेगी। ऑनलाइन बिक्री की भी अनुमति नहीं होगी। प्रदूषण पर प्रशासन को निगरानी के निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को अवैध पटाखों की बिक्री पर नजर रखने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, प्रदूषण के स्तर की समीक्षा करने और अस्पतालों में मरीजों की संख्या से संबंधित आंकड़े जुटाने को कहा है। संबंधित अधिकारियों को 14 दिसंबर तक अदालत में रिपोर्ट पेश करनी होगी। पूर्ण प्रतिबंध नहीं समाधान इससे पहले कोर्ट ने दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पाने पर सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा कि त्योहारों के दौरान प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल पूर्ण प्रतिबंध ही एकमात्र समाधान नहीं है। ये भी पढ़ें: इटावा में चार बच्चों के सामने उजड़ा परिवार, पत्नी का गाला दबाकर फरार हुआ पति