जुलाई महीने के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने शानदार शुरुआत करते हुए निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी। लगातार तीन कारोबारी सत्रों तक दबाव में रहने के बाद बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत, अमेरिकी बाजारों की मजबूत चाल और वैश्विक स्तर पर बेहतर निवेश माहौल ने घरेलू बाजार को नई ऊर्जा दी। हालांकि बाजार में आई इस तेजी के बावजूद निवेशकों की नजर अब भी पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सेंसेक्स और निफ्टी ने दिखाई मजबूती दोपहर के कारोबार तक बीएसई सेंसेक्स करीब 474 अंकों की तेजी के साथ 76,952.29vपर कारोबार करता दिखा। वहीं एनएसई निफ्टी-50 लगभग 137 अंक चढ़कर 24,002.65 के स्तर पर पहुंच गया। खास बात यह रही कि निफ्टी ने करीब दो सप्ताह बाद एक बार फिर 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया। बाजार खुलने के साथ ही खरीदारी का माहौल बना रहा और दिन के दौरान निफ्टी ने 24,026.85 का इंट्राडे हाई भी छुआ। निवेशकों ने अधिकांश सेक्टरों में खरीदारी दिखाई, जिससे बाजार की मजबूती पूरे सत्र में बनी रही। आखिर क्यों लौटी बाजार में तेजी? बाजार में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया से आई राहत भरी खबर रही। ईरान की ओर से संकेत मिले कि वह कतर की राजधानी दोहा में मध्यस्थों के साथ बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने को तैयार है। इससे क्षेत्र में लंबे समय तक संघर्ष की आशंका कुछ कम हुई और वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा। इसके साथ ही मंगलवार रात अमेरिकी शेयर बाजारों में आई मजबूत तेजी का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिला। एशियाई बाजारों में मिश्रित कारोबार के बावजूद भारतीय बाजारों में खरीदारी का माहौल बना रहा। हालांकि तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह दोहा में मौजूद अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधे बातचीत नहीं करेगा। ऐसे में तनाव पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद अभी नहीं की जा सकती। यही कारण है कि बाजार विशेषज्ञ आने वाले दिनों में अस्थिरता बने रहने की संभावना जता रहे हैं। व्यापक बाजार में दिखा ज्यादा दम बुधवार के कारोबार में केवल प्रमुख सूचकांक ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। मिडकैप और अन्य व्यापक सूचकांकों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों ने बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मझोली कंपनियों के शेयरों में भी भरोसा दिखाया। इससे यह संकेत मिला कि बाजार में तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि निवेशकों की भागीदारी व्यापक स्तर पर देखने को मिली। इन सेक्टरों ने संभाली बाजार की कमान सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो मीडिया सेक्टर सबसे आगे रहा। मीडिया कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा रियल्टी और एफएमसीजी सेक्टर ने भी शानदार प्रदर्शन किया। बेहतर जोखिम लेने की क्षमता और घरेलू मांग से जुड़े शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ने का फायदा इन सेक्टरों को मिला। उपभोक्ता टिकाऊ सामान और कुछ फार्मा शेयरों में भी शुरुआती कारोबार में अच्छी तेजी दर्ज की गई। दूसरी ओर आईटी सेक्टर दबाव में बना रहा। लगातार दूसरे दिन टेक शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। वहीं मेटल और कुछ फार्मा कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली के कारण हल्की कमजोरी दर्ज की गई। इन शेयरों ने बटोरी सुर्खियां निफ्टी-50 के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी Eternal के शेयर में देखने को मिली। इसके अलावा Adani Ports, Nestlé India, Asian Paints और Mahindra & Mahindra के शेयरों में भी मजबूत खरीदारी दर्ज की गई। इन कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने प्रमुख सूचकांकों को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तकनीकी संकेत क्या कहते हैं? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,800 से 23,750 का दायरा फिलहाल मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यह वही क्षेत्र है जहां जून के मध्य में बना गैप मौजूद है। जब तक निफ्टी इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में सकारात्मक रुख बरकरार रहने की संभावना है। वहीं बैंक निफ्टी अभी भी अपने हालिया उच्च स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इसमें निर्णायक ब्रेकआउट मिलता है तो आगे और तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल 57,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि ऊपर की ओर अगला बड़ा लक्ष्य 59,200 के आसपास देखा जा रहा है। आगे किन बातों पर रहेगी नजर? बाजार की आगे की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। सबसे पहले पश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक बातचीत का क्या परिणाम निकलता है, इस पर निवेशकों की नजर रहेगी। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य बने रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है, तो जुलाई सीरीज में बाजार की सकारात्मक धारणा मजबूत हो सकती है। हालांकि किसी भी नकारात्मक वैश्विक घटनाक्रम की स्थिति में उतार-चढ़ाव फिर से बढ़ सकता है। फिलहाल जुलाई की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए उत्साहजनक रही है। लेकिन निवेशकों के लिए यह समय केवल तेजी का जश्न मनाने का नहीं, बल्कि सतर्कता के साथ आगे बढ़ने का भी है। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि बुधवार की यह शानदार वापसी लंबी रैली की शुरुआत है या फिर केवल अस्थायी राहत।