विदेश

आतंकवाद बंद करो, तभी होगी बात… सिंधु जल संधि पर भारत का पाकिस्तान को सख्त संदेश

भारत ने पाकिस्तान से साफ कहा कि सीमा-पार आतंकवाद पूरी तरह बंद किए बिना सिंधु जल संधि पर कोई बातचीत नहीं होगी। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि फिलहाल समझौता स्थगित रहेगा।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

India On Pakistan: भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर उसका रुख नहीं बदला है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को दो टूक कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक इस समझौते पर आगे कोई बातचीत संभव नहीं है।

आतंकवाद पर सख्त रुख

साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगातार आतंकवाद को समर्थन मिलने के कारण भारत ने सिंधु जल संधि को फिलहाल स्थगित रखा है। उन्होंने दोहराया कि भारत का यह फैसला आतंकवाद के खिलाफ उसकी स्पष्ट और सख्त नीति का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कदम उठाने होंगे। भारत का मानना है कि जब तक सीमा-पार आतंकी गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लगती, तब तक सामान्य द्विपक्षीय प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

भारत ने यह फैसला 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लिया था। इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल संधि को रोकने का निर्णय भी शामिल था। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। हाल ही में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी ने भारत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवनरेखा है और पानी को किसी भी तरह के दबाव या रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पानी को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया तो इसे पाकिस्तान के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा माना जाएगा।

आतंकवाद पर समझौता नहीं

इस बीच विदेश मंत्रालय ने तीस्ता नदी परियोजना पर भी अपना पक्ष दोहराते हुए कहा कि भारत इस विषय पर अपना रुख पहले ही बांग्लादेश को स्पष्ट कर चुका है।
भारत का संदेश साफ है आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि समेत अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर आगे बढ़ने की संभावना बेहद सीमित रहेगी।

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