भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत दबाव के साथ हुई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने दुनियाभर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संकट, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख का सीधा असर भारतीय बाजार पर देखने को मिला। निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाते हुए जमकर बिकवाली की, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। सेंसेक्स 540 अंक से ज्यादा टूटा, निफ्टी 24,240 के नीचे बुधवार सुबह शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 540 अंक की गिरावट के साथ 77,640 के स्तर के आसपास पहुंच गया। यह गिरावट लगभग 0.69 प्रतिशत रही। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 इंडेक्स भी कमजोर शुरुआत के साथ करीब 164 अंक टूटकर 24,240 के स्तर से नीचे आ गया। इस गिरावट ने निवेशकों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है, क्योंकि इससे पहले बाजार लगातार चार कारोबारी सत्रों तक तेजी में था। मंगलवार को भी बाजार में दबाव देखने को मिला था। सेंसेक्स 104.35 अंक गिरकर 78,180.72 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी-50 करीब 31.65 अंक की गिरावट के साथ 24,398.70 के स्तर पर बंद हुआ था। दिन की शुरुआत में बाजार ने मजबूती दिखाई थी, लेकिन आखिरी घंटों में हुई भारी बिकवाली ने तेजी को कमजोर कर दिया। बाजार के लिए सबसे बड़ा खतरा बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। ईरान के ठिकानों पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में डर का माहौल पैदा कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह की अस्थिरता से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसी आशंका के चलते तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर उन देशों पर पड़ सकता है जो तेल आयात पर निर्भर हैं। भारत भी दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता निवेशकों को परेशान कर रही है। एशियाई बाजारों में भी दिखी कमजोरी भारतीय बाजार की गिरावट केवल घरेलू कारणों तक सीमित नहीं रही। एशिया के कई प्रमुख बाजार भी दबाव में नजर आए। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 0.64 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। ग्लोबल बाजारों में खासतौर पर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों को चिंता है कि AI कंपनियों के शेयरों का मूल्यांकन काफी बढ़ चुका है और आने वाले समय में इसमें सुधार देखने को मिल सकता है। ऑयल एंड गैस शेयरों पर दबाव बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ सेक्टरों ने मजबूती दिखाई। निफ्टी फार्मा इंडेक्स सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सेक्टरों में रहा। वहीं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स पर दबाव देखने को मिला। शेयरों की बात करें तो ONGC, Wipro और Dr. Reddy’s Laboratories जैसे शेयरों में मजबूती रही। दूसरी तरफ Shriram Finance में करीब 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ईरान संकट के कारण एविएशन सेक्टर भी दबाव में रहा और IndiGo के शेयरों में लगभग 2.5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। मंगलवार के कारोबार में Trent, Adani Enterprises और Bharat Electronics जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी ने भी बाजार के प्रदर्शन को प्रभावित किया था। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में बाजार का व्यापक रुख भी कमजोर रहा। बीएसई पर गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से ज्यादा रही, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिल रहे हैं कि केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम स्तर के शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना हुआ है। अमेरिकी बाजारों की कमजोरी का भी असर भारतीय बाजार को विदेशी संकेतों से भी झटका मिला। मंगलवार रात अमेरिकी शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। AI सेक्टर में बढ़ते वैल्यूएशन को लेकर चिंता के कारण टेक कंपनियों के शेयरों में बिकवाली हुई, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ा। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। निवेशक अब पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों की नजर अब निफ्टी और सेंसेक्स के अहम सपोर्ट स्तरों, विदेशी निवेश के रुझान और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर रहेगी। बाजार में अस्थिरता के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और जोखिम को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाने की जरूरत होगी। डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है और इसे निवेश सलाह न माना जाए। निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।