विदेश

होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव! ईरान ने लौटाया भारतीय टैंकर, समुद्री रास्ते पर बढ़ा खतरा

होर्मुज में तनाव फिर बढ़ा। ईरान ने भारतीय तेल टैंकर को लौटाया। एक दिन पहले भारत आ रहे एलएनजी जहाज पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वैश्विक समुद्री सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Hormuz Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर साफ दिखाई देने लगा है। कुछ दिनों की शांति के बाद यहां हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। बुधवार को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक भारतीय तेल टैंकर को निर्धारित मार्ग से वापस लौटा दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही भारत की ओर आ रहे एक अन्य जहाज पर ड्रोन हमला हुआ था। लगातार हो रही इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

भारतीय टैंकर रोका

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक भारतीय तेल टैंकर ओमान के समुद्री कॉरिडोर का इस्तेमाल करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान ईरानी सुरक्षा बलों ने रेडियो संदेश के जरिए जहाज को रोकते हुए उस मार्ग पर आपत्ति जताई और टैंकर को वापस लौटने का निर्देश दिया। इसके बाद जहाज को अपनी यात्रा रोकनी पड़ी।

ईरान-अमेरिका टकराव

दरअसल, 24 जून को ओमान और संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक अस्थायी समुद्री कॉरिडोर बनाया था। इस मार्ग की निगरानी अमेरिका कर रहा है। हालांकि ईरान इस कॉरिडोर को स्वीकार नहीं कर रहा और वह जहाजों को अपने तय किए गए समुद्री मार्ग से गुजरने का निर्देश दे रहा है।

रूट बदलने के निर्देश

फार्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) लगातार रेडियो संचार के माध्यम से जहाजों को चेतावनी देता है कि वे ओमान कॉरिडोर की बजाय ईरान द्वारा स्वीकृत मार्ग का उपयोग करें। बुधवार सुबह होर्मुज से गुजरने वाले अधिकांश जहाजों ने भी ईरानी निर्देशों का पालन करते हुए उसी कॉरिडोर का इस्तेमाल किया।

समुद्र में ड्रोन अटैक

तनाव की शुरुआत मंगलवार को और बढ़ गई थी, जब कतर से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर भारत के गुजरात की ओर आ रहे एक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ। हमले के दौरान जहाज के इंजन रूम में आग लग गई थी। जहाज पर कुल 29 चालक दल के सदस्य मौजूद थे, जिनमें चार भारतीय नागरिक भी शामिल थे। राहत की बात यह रही कि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए और समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। इसी दौरान सऊदी अरब की राष्ट्रीय शिपिंग कंपनी बहरी ने भी पुष्टि की कि उसके टैंकर पर हुए हमले के बावजूद जहाज, उसका कार्गो और चालक दल सुरक्षित हैं तथा पोत अभी भी समुद्र में संचालन करने की स्थिति में है।

अमेरिका का पलटवार

समुद्री हमलों के बाद अमेरिका ने भी बड़ा सैन्य कदम उठाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर, तटीय रडार, एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी की कई तेज़ हमला करने वाली नौकाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखना और जहाजों पर हो रहे हमलों की क्षमता को कमजोर करना था।

खाड़ी में बढ़ा तनाव

इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत और बहरीन की दिशा में सैन्य कार्रवाई की, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं और गहरा गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ता रहा तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग कारोबार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर बनी हुई है, जहां हर नया घटनाक्रम वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर सकता है।

ये भी पढें: होर्मुज में दो जहाजों पर हमले से मचा हड़कंप, अमेरिका ने ईरान पर साधा निशाना

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Translate »