अयोध्याउत्तर प्रदेश

राम मंदिर में चढ़ावा गिनने वाले 20 से अधिक कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा, भुगतान न मिलने पर छोड़ी नौकरी

अयोध्या राम मंदिर में भुगतान विवाद के चलते 20 कर्मचारियों ने इस्तीफा दिया। उधर, SIT जांच में दान चोरी की रकम शेयर बाजार और ब्याज पर लगाने के आरोपों की जांच जारी है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर दान में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) नए-नए खुलासे कर रही है, वहीं दूसरी ओर चढ़ावे की गिनती में लगे 20 से अधिक कर्मचारियों ने एक साथ इस्तीफा देकर व्यवस्था को झटका दे दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे लगातार अधिक काम कराया जा रहा था, लेकिन लंबे समय से भुगतान नहीं किया गया। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने सामूहिक रूप से काम छोड़ दिया।

भुगतान विवाद के बाद बदली व्यवस्था

कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है। पहले यह काम दो शिफ्टों में होता था। पहली शिफ्ट सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक चलती थी। अब स्टाफ की कमी के कारण गिनती का काम केवल एक शिफ्ट में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाएगा।

स्टाफ संकट गहराया

सूत्रों के मुताबिक, दोनों शिफ्टों के बचे हुए कर्मचारियों को एक टीम में शामिल कर दिया गया है। फिलहाल करीब 15 से 16 कर्मचारियों के सहारे ही पूरी व्यवस्था संचालित की जा रही है। नए कर्मचारियों की नियुक्ति होने तक यही व्यवस्था जारी रहने की संभावना है, जिससे मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव भी बढ़ गया है।

दान चोरी के पैसे से निवेश का दावा

उधर, राम मंदिर चढ़ावा गड़बड़ी मामले की जांच कर रही SIT की पड़ताल में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर दान से चोरी की गई रकम का एक हिस्सा शेयर बाजार में निवेश किया। इसके अलावा कुछ धन लोगों को ब्याज पर उधार देने में भी इस्तेमाल किया गया। इन दावों के बाद जांच एजेंसियां आरोपियों से जुड़े लोगों के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित धन का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

SIT की जांच में यह भी सामने आया है कि दान प्रबंधन से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा और काउंटिंग इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव दान प्रबंधन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे थे। जांच में दावा किया गया है कि दान की सुरक्षा और गिनती से जुड़े कई जरूरी नियमों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं ली जा रही थी और इस संबंध में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम भी समय पर नहीं उठाए गए।

सुरक्षा नियमों पर सवाल

SIT ने यह भी उल्लेख किया है कि बायोमेट्रिक उपस्थिति, निर्धारित ड्रेस कोड, गिनती कक्ष में निजी सामान ले जाने पर रोक, दान की व्यवस्थित गणना, नोटों का दस्तावेजीकरण और दैनिक रिपोर्टिंग जैसी प्रक्रियाएं पूरी तरह लागू नहीं थीं। जांच एजेंसी अब पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है और संबंधित सभी पहलुओं की जांच जारी है।

ये भी पढ़ें: लाखों की रकम, महंगे गिफ्ट और टूटती शादी… राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच में सामने आई चौंकाने वाली कहानी

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