उत्तर प्रदेश

वाराणसी में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी, 250 युवक-युवतियों को पुलिस ने कराया मुक्त

वाराणसी में फर्जी MLM नेटवर्क का खुलासा, नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी। पुलिस ने 250 युवक-युवतियों को मुक्त कराया, 20 आरोपी गिरफ्तार, 4 करोड़ लेनदेन की जांच जारी।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Varanasi Fake MLM Scam: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में नौकरी के नाम पर बेरोजगार युवाओं को ठगी के जाल में फंसाने वाले एक बड़े फर्जी मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) और पिरामिड चेन नेटवर्क का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। रोहनिया थाना क्षेत्र में कॉरपोरेट ऑफिस की आड़ में चल रहे इस कथित नेटवर्क पर पुलिस ने छापेमारी कर 250 युवक-युवतियों को मुक्त कराया, जबकि 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में गिरोह के बैंक खातों में पिछले एक वर्ष के दौरान करीब 4 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई है।

कॉरपोरेट ऑफिस की आड़ में खेल

डीसीपी क्राइम नीतू कादयान के अनुसार, साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत रोहनिया पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने संयुक्त कार्रवाई की। जांच में पता चला कि आरोपी ‘महादेव इंटरप्राइजेज’ के नाम से कंपनी संचालित कर रहे थे और ‘Royal Health Wellness Private Limited’ की फ्रेंचाइजी का दावा करते हुए अवैध MLM और पिरामिड चेन स्कीम चला रहे थे। गिरोह का मुख्य निशाना नौकरी की तलाश कर रहे युवा थे। उन्हें आकर्षक वेतन और कॉरपोरेट करियर का सपना दिखाकर इस नेटवर्क से जोड़ा जाता था।

25 हजार रुपये की नौकरी का लालच

पुलिस के मुताबिक, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के बेरोजगार युवक-युवतियों को फोन और सोशल मीडिया के जरिए संपर्क किया जाता था। उन्हें टाटा कंपनी, कृषि क्षेत्र या निजी कॉरपोरेट नौकरी में 25 हजार रुपये मासिक वेतन का झांसा देकर वाराणसी बुलाया जाता था। यहां पहुंचने पर उनका इंटरव्यू लिया जाता और चयन का भरोसा दिलाकर रजिस्ट्रेशन या जॉइनिंग फीस के नाम पर 30 से 35 हजार रुपये जमा कराए जाते थे। बदले में उन्हें केवल 1,000 से 2,000 रुपये कीमत की एक साधारण किट दी जाती थी, जिसमें कपड़े, तेल, साबुन और अन्य सामान्य सामान शामिल होता था।

ब्रेनवॉश कर बनाते थे नए सदस्य

जांच में सामने आया कि फीस जमा कराने के बाद युवाओं को ट्रेनिंग सेंटर में रखा जाता था। यहां उन्हें मनोवैज्ञानिक तरीके से प्रभावित कर जल्द अमीर बनने, लग्जरी लाइफस्टाइल और आर्थिक सफलता के सपने दिखाए जाते थे। इसके बाद प्रत्येक सदस्य पर कम से कम तीन नए लोगों को नेटवर्क से जोड़ने का दबाव** बनाया जाता था। जो लोग ऐसा नहीं कर पाते थे, उन्हें वेतन रोकने और जमा रकम वापस न करने की धमकी दी जाती थी। इसी दबाव के कारण कई युवक-युवतियां इस नेटवर्क में फंसकर दूसरों को जोड़ने के लिए मजबूर हो जाते थे।

250 युवक-युवतियों को कराया मुक्त

गुरुवार को रोहनिया क्षेत्र के एक तीन मंजिला भवन पर पुलिस ने छापा मारा। कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद 250 युवक-युवतियों को इस नेटवर्क से मुक्त कराया गया। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन और दो लग्जरी कारें भी बरामद की गई हैं।

एक साल में 4 करोड़ रुपये का लेनदेन

एसीपी क्राइम विदुष सक्सेना ने बताया कि गिरोह का मुख्य सरगना दीपक कुमार शाह, बिहार का निवासी है। उसके SBI और HDFC बैंक खातों की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार पिछले एक वर्ष में इन खातों में करीब 4 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। अब तक NCRP पोर्टल पर नौकरी के नाम पर ठगी की पांच शिकायतें दर्ज मिली हैं, जबकि चार अन्य पीड़ितों ने भी लिखित शिकायत दी है। यानी फिलहाल कुल नौ शिकायतें पुलिस के सामने आ चुकी हैं। आशंका है कि पीड़ितों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

कई राज्यों तक फैला नेटवर्क

पुलिस की जांच में पता चला है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सक्रिय था। सोशल मीडिया, फोन कॉल और फर्जी नौकरी विज्ञापनों के जरिए बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया जाता था। फिलहाल पुलिस बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड, अन्य राज्यों में सक्रिय नेटवर्क और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस पूरे रैकेट से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

युवाओं से पुलिस की अपील

पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि किसी भी नौकरी के बदले पहले से रजिस्ट्रेशन फीस या जॉइनिंग चार्ज मांगने वाली संस्थाओं से सतर्क रहें। किसी भी कंपनी में पैसा जमा करने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें।

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