दोपहर के कारोबार तक बीएसई सेंसेक्स 469.21 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,524.15 पर पहुंच गया। वहीं एनएसई निफ्टी 50 128.30 अंक यानी 0.53 प्रतिशत मजबूत होकर 24,180.35 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। सबसे अहम बात यह रही कि निफ्टी एक बार फिर 24,100 के स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहा। पिछले कारोबारी सत्र में यह स्तर टूट गया था, इसलिए इसकी वापसी को तकनीकी और मनोवैज्ञानिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेशी बाजारों से मिला मजबूत सहारा भारतीय बाजार की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक बाजारों का सकारात्मक माहौल रहा। मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। खासकर तकनीकी शेयरों में खरीदारी से नैस्डैक कंपोजिट ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसी सकारात्मक रुख का असर बुधवार को एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला। जापान का निक्केई 225, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। कोस्पी में सात प्रतिशत से अधिक की उछाल ने एशियाई निवेशकों का मनोबल बढ़ाया, जबकि निक्केई और हैंग सेंग में भी एक प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई। इन संकेतों का सीधा फायदा भारतीय बाजार को मिला और निवेशकों ने शुरुआती घंटों में जमकर खरीदारी की। हालांकि, दोपहर बाद मुनाफावसूली शुरू होने से शुरुआती तेजी कुछ कम हो गई, लेकिन प्रमुख सूचकांक पूरे समय हरे निशान में बने रहे। भू-राजनीतिक तनाव बना सबसे बड़ा जोखिम बाजार की इस रिकवरी के बावजूद पश्चिम एशिया का तनाव निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। संघर्षविराम के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच हमलों की खबरों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और रिवोल्यूशनरी गार्ड की ओर से तेल टैंकरों पर मिसाइल हमलों की खबरों ने ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी। इसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक महीने के उच्च स्तर के करीब पहुंच गईं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। यही कारण है कि बाजार में तेजी के बावजूद निवेशक पूरी तरह आक्रामक रुख अपनाने से बचते दिखाई दिए। इन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा ताकत बुधवार के कारोबार में कई प्रमुख शेयरों में शानदार खरीदारी देखने को मिली। श्रीराम फाइनेंस और अल्ट्राटेक सीमेंट निफ्टी के सबसे बड़े गेनर रहे और दोनों में 2.8 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा इटरनल, एचडीएफसी लाइफ और इंडिगो के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी रही। वहीं दूसरी ओर इंफोसिस, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, डॉ. रेड्डीज, टाटा कंज्यूमर और हिंडाल्को में कमजोरी बनी रही। निवेशकों ने विशेष रूप से आईटी शेयरों में तिमाही नतीजों से पहले सतर्क रुख अपनाया। सेक्टोरल इंडेक्स में सीमेंट सबसे आगे सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी सीमेंट इंडेक्स 2.24 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद निफ्टी केमिकल्स और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज एक्स-बैंक में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई। वहीं निफ्टी आईटी ऐसा इकलौता प्रमुख सेक्टर रहा जिसमें कमजोरी दिखाई दी ब्रॉडर मार्केट ने भी निवेशकों को निराश नहीं किया। निफ्टी स्मॉलकैप 100, स्मॉलकैप 250, स्मॉलकैप 50 और मिडकैप 100 सभी सकारात्मक दायरे में कारोबार करते रहे। इससे संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिड और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी बनी हुई है। मंगलवार की गिरावट से कैसे बदला माहौल बुधवार की तेजी को समझने के लिए मंगलवार की गिरावट को देखना जरूरी है। एक दिन पहले सेंसेक्स 561.46 अंक, निफ्टी 158.95 अंक और बैंक निफ्टी 669.15 अंक टूटकर बंद हुए थे। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,000 के महत्वपूर्ण स्तर तक फिसल गया था। इस गिरावट के पीछे कई कारण थे। जून महीने की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.38 प्रतिशत पहुंच गई थी, जो भारतीय रिजर्व बैंक के चार प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर थी। इसके अलावा कुछ बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों के बाद भी निवेशकों की उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं, जिससे बाजार में बिकवाली बढ़ गई। FII बेच रहे, DII दे रहे सहारा निवेश प्रवाह के आंकड़े भी बाजार की दिशा समझने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 14 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने लगभग 739.69 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 2,927.71 करोड़ रुपये की खरीदारी की। यानी विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों ने बाजार को मजबूत सहारा दिया और बड़ी गिरावट आने से बचाया। भारत-ब्रिटेन FTA से नए अवसर बाजार के लिए एक सकारात्मक खबर यह भी रही कि 15 जुलाई से भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) प्रभावी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे ज्यादा फायदा टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को मिल सकता है। आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों से जुड़े शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं। तकनीकी संकेत क्या कहते हैं? तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार फिलहाल निफ्टी के लिए 24,000 और सेंसेक्स के लिए 77,000 सबसे अहम सपोर्ट स्तर बने हुए हैं। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर बना रहता है तो निफ्टी 24,250 से 24,350 तक और सेंसेक्स 77,500 से 77,800 तक बढ़ सकता है। वहीं यदि यह सपोर्ट टूटता है तो बाजार में दोबारा कमजोरी देखने को मिल सकती है। बैंक निफ्टी भी पिछले कई सप्ताह से सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इसके 58,700 के ऊपर निकलने पर नई तेजी का दौर शुरू हो सकता है। इंडिया VIX अभी मध्यम स्तर पर बना हुआ है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार में घबराहट नहीं है, लेकिन अनिश्चितता पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई है। भारतीय बाजार में खरीदारी बुधवार की तेजी ने यह जरूर दिखाया कि भारतीय बाजार में खरीदारी की ताकत अभी खत्म नहीं हुई है। वैश्विक संकेत, घरेलू लिक्विडिटी और सकारात्मक आर्थिक घटनाक्रम बाजार को सहारा दे रहे हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी बड़े जोखिम बने हुए हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह देखना अहम होगा कि निफ्टी 24,000 और सेंसेक्स 77,000 के ऊपर अपनी पकड़ बनाए रख पाते हैं या नहीं। यदि यह स्तर कायम रहते हैं तो बाजार में आगे भी तेजी का माहौल बन सकता है, लेकिन किसी भी नकारात्मक वैश्विक खबर से उतार-चढ़ाव फिर तेज हो सकता है। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।