भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही और दिन बढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और तेज हो गया। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू बाजार में निवेशकों का भरोसा डगमगाता नजर आया। बीएसई सेंसेक्स करीब 600 अंकों की गिरावट के साथ 76,800 के आसपास पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी 24,000 के स्तर के करीब फिसल गया। खास बात यह रही कि यह गिरावट ऐसे समय आई, जब एशियाई बाजारों में सुबह तेजी का रुख देखने को मिला था और अमेरिकी बाजारों ने भी मंगलवार को मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया था। इसके बावजूद भारतीय बाजारों में भारी बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। ईरान तनाव और कच्चे तेल ने बिगाड़ा बाजार का मूड बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। कुवैत की तेल सुविधाओं पर ईरानी ड्रोन हमलों की खबरों और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड ऑयल 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो पिछले कई हफ्तों का ऊंचा स्तर है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है, ऐसे में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, चालू खाता घाटे और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं। तेल की कीमतों में तेजी से निवेशकों को चिंता है कि आने वाले समय में ईंधन कीमतों और महंगाई पर इसका असर पड़ सकता है। यही वजह रही कि बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता गया। रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाई चिंता बाजार पर दबाव की एक और वजह रुपये में कमजोरी रही। डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा दबाव में नजर आई और करीब 96.2 के स्तर के आसपास कारोबार करती दिखी। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश को प्रभावित कर सकता है और आयात लागत को बढ़ा सकता है। बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में भारी दबाव बुधवार के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर में देखने को मिला। निवेशकों ने इन सेक्टरों में जमकर बिकवाली की, जिससे बाजार की गिरावट और गहरी हो गई। बीएसई मिडकैप इंडेक्स करीब 0.7 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 1.1 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। इससे संकेत मिला कि दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक बाजार पर भी इसका असर पड़ा। बाजार के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में सन फार्मा, एक्सिस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जैसे बड़े नाम शामिल रहे। इन शेयरों में मुनाफावसूली का असर देखने को मिला। हालांकि, बाजार में कुछ कंपनियों ने मजबूती भी दिखाई। टाइटन कंपनी और मारुति सुजुकी जैसे चुनिंदा शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इससे संकेत मिला कि निवेशक कुछ मजबूत कंपनियों में अभी भी भरोसा बनाए हुए हैं। FII-DII आंकड़ों से क्या संकेत मिले? मंगलवार के कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब 1,650 करोड़ रुपये की खरीदारी की। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की ओर से करीब 657 करोड़ रुपये की बिकवाली दर्ज की गई। इन आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी निवेशक पूरी तरह बाजार से दूरी नहीं बना रहे हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर सतर्कता बनी हुई है। निवेशकों के लिए आगे की रणनीति बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे अचानक गिरावट देखकर घबराहट में फैसले लेने से बचें। लंबी अवधि के निवेशकों को अपनी रणनीति और पोर्टफोलियो के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह के रूप में न लें। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।